महिला सशक्तिकरण की बात हो और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का जिक्र न हो, ऐसा हो नहीं सकता. इतिहास में कुछ ऐसी महिलाएं रही हैं, जिन्होंने न सिर्फ सत्ता की बागडोर संभाली, बल्कि अपनी नेतृत्व क्षमता से दुनिया को नया नजरिया दिया. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आज हम आपको उन दो महिलाओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने बतौर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पहली बार इतिहास रचा.
श्रीलंका की सिरिमाओ भंडारनायके दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं, जबकि अर्जेंटीना की इसाबेल पेरोन को पहली महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त हुआ. इन दोनों महिलाओं ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की और राजनीतिक इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गईं.
17 अप्रैल 1916 को श्रीलंका के रत्नापुरा में जन्मीं सिरिमाओ भंडारनायके राजनीति में आने से पहले समाज कल्याण कार्यों में रुचि रखती थीं. 1940 में उनकी शादी राजनेता एस.डब्ल्यू.आर.डी. भंडारनायके से हुई. उनके पति 1956 में श्रीलंका के प्रधानमंत्री बने, लेकिन 1959 में उनकी हत्या कर दी गई.
पति की हत्या के बाद, उनकी पार्टी श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (SLFP) ने सिरिमाओ को पार्टी का नेतृत्व सौंप दिया. 1960 के आम चुनाव में उनकी पार्टी को भारी बहुमत मिला और इस तरह वे श्रीलंका की ही नहीं, बल्कि दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गईं. उन्होंने 1965 तक पद संभाला और फिर 1970-77 और 1994-2000 तक दोबारा प्रधानमंत्री रहीं.
सिरिमाओ भंडारनायके ने अपने शासनकाल में समाजवादी नीतियों को बढ़ावा दिया और कई आर्थिक उपक्रमों का राष्ट्रीयकरण किया. उनकी सरकार का एक बड़ा फैसला सिंहली भाषा को श्रीलंका की एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाना था. उनके नेतृत्व में श्रीलंका की विदेश नीति गुटनिरपेक्ष रही और उन्होंने वैश्विक मंच पर अपने देश की प्रभावशाली पहचान बनाई.
4 फरवरी 1931 को जन्मीं इसाबेल पेरोन दुनिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं. वे अर्जेंटीना के पूर्व राष्ट्रपति जुआन पेरोन की तीसरी पत्नी थीं और उनके कार्यकाल में उपराष्ट्रपति के रूप में कार्यरत थीं. 1974 में जुआन पेरोन के निधन के बाद, इसाबेल को अर्जेंटीना का राष्ट्रपति बनाया गया.
उनका कार्यकाल चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि उन्हें सत्ता ऐसे समय में मिली जब देश गंभीर आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति, श्रमिक असंतोष और राजनीतिक हिंसा से जूझ रहा था. उनके शासनकाल के दौरान उनके सामाजिक कल्याण मंत्री लोपेज रेगा पर भ्रष्टाचार और आतंकवाद के आरोप लगे, जिसके चलते उन्हें निर्वासन में जाना पड़ा.
उनकी नीतियों और प्रशासनिक फैसलों की आलोचना होने लगी, और उन्हें इस्तीफा देने की सलाह दी गई, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया. 1976 में, अर्जेंटीना की वायु सेना के अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उन्हें नजरबंद कर दिया गया.
सिरिमाओ भंडारनायके और इसाबेल पेरोन ने अपने-अपने देशों में सत्ता संभालकर महिला नेतृत्व की मिसाल कायम की. इनके योगदान ने महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और दिखाया कि महिलाएं भी दुनिया की सबसे ऊंची सत्ता संभाल सकती हैं. First Updated : Saturday, 08 March 2025