शांति की उम्मीदों पर बमबारी, लेबनान में 18 मौतों से डगमगाई अमेरिका-ईरान डील

इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच लेबनान में संघर्ष फिर तेज हो गया है, जिसमें इजरायल के 4 सैनिक और लेबनान में कम से कम 18 लोग मारे गए हैं. बढ़ती हिंसा से हाल ही में हुई अमेरिका-ईरान डील पर संकट गहरा गया है और क्षेत्र में फिर बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों के बीच इजरायल और लेबनान सीमा पर एक बार फिर हिंसा तेज हो गई है. दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना और ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह के बीच रातभर चली भीषण लड़ाई में इजरायल के चार सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. दूसरी ओर, लेबनान में इजरायली हवाई हमलों के कारण कम से कम 18 लोगों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने की खबर है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था.

सैन्य अधिकारियों का क्या कहना है?

इजरायली सेना के अनुसार मारे गए सैनिकों में एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल था. इसके अलावा हिज्बुल्लाह की ओर से किए गए ड्रोन हमले में पांच सैनिक घायल हुए. सैन्य अधिकारियों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में कई मोर्चों पर झड़पें हुईं और संघर्ष की तीव्रता हाल के महीनों में सबसे अधिक रही.

उधर, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश के दक्षिणी हिस्से में कई कस्बों पर हुए हवाई हमलों में बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए हैं. राहत और बचाव कार्यों में भी कठिनाइयां आ रही हैं क्योंकि लगातार बमबारी के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. अधिकारियों का अनुमान है कि मृतकों की संख्या आगे बढ़ सकती है. सबसे अधिक नुकसान टायर शहर के निकट हारौफ गांव में हुआ, जहां कई मकान ध्वस्त हो गए और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका बनी हुई है.

संघर्ष के बीच फ्रांस ने अमेरिका से हस्तक्षेप करने और इजरायल पर दबाव बनाने की अपील की है ताकि लेबनान में युद्धविराम सुनिश्चित किया जा सके. फ्रांसीसी अधिकारियों का मानना है कि यदि यह लड़ाई जारी रहती है तो अमेरिका और ईरान के बीच हाल में बनी सहमति कमजोर पड़ सकती है. यह समझौता पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां कम करने और आगे की बातचीत का रास्ता खोलने के उद्देश्य से किया गया था.

इजरायल का कहना है कि उसके हमले हिज्बुल्लाह की गतिविधियों के जवाब में किए गए हैं. इजरायली सेना के मुताबिक संगठन लगातार संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा था और सीमा के पास अपने ठिकानों से हमले कर रहा था. वहीं लेबनानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष बढ़ने के बाद दक्षिणी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिक सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं.

रात की सबसे अहम भिड़ंत लितानी नदी के उत्तर में स्थित अली अल-ताहेर पहाड़ी क्षेत्र में हुई. यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. हिज्बुल्लाह ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने घात लगाकर हमला किया और इजरायली सैन्य वाहनों को निशाना बनाया. संगठन का यह भी कहना है कि उसने रॉकेट और मिसाइलों के जरिए इजरायली सेना को भारी नुकसान पहुंचाया.

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. समझौते के तहत दोनों पक्षों ने तनाव कम करने, परमाणु मुद्दे पर आगे बातचीत करने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे कदमों पर सहमति जताई है. हालांकि लेबनान में बढ़ती हिंसा ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया है. इसी कारण अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा भी स्थगित कर दिया गया, जहां ईरान के साथ अगले दौर की वार्ता प्रस्तावित थी.

समझौते को लेकर मतभेद

इजरायल के भीतर भी इस समझौते को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं. कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने सैनिकों की मौत के बाद कड़ा रुख अपनाने की मांग की है. दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और युद्ध को व्यापक रूप लेने से रोकने की कोशिश कर रहा है.

विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान मोर्चे पर हालात जल्द नहीं सुधरे तो अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रक्रिया बाधित हो सकती है. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस नए संकट को नियंत्रित कर पाएंगे या मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा.

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