चार महीने बाद अली खामेनेई का अंतिम संस्कार: बिना केमिकल लंबे समय तक कैसे सुरक्षित रखी डेड बॉडी?
खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले मार्च में होना था, लेकिन अमेरिका और इजरायल के साथ जारी जंग के चलते इसे बार-बार टाला गया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि युद्ध के कारण पैदा हुई सुरक्षा स्थिति को देखते हुए देरी जरूरी थी।

नई दिल्ली: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चार महीने बाद राजकीय सम्मान के साथ किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन होगा। 37 साल तक ईरान की सियासत, सेना और धार्मिक संस्थाओं पर राज करने वाले 86 वर्षीय खामेनेई 28 फरवरी को तेहरान में अपने घर पर अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों में मारे गए थे।
युद्ध की वजह से टलता रहा अंतिम संस्कार
खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले मार्च में होना था, लेकिन अमेरिका और इजरायल के साथ जारी जंग के चलते इसे बार-बार टाला गया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि युद्ध के कारण पैदा हुई सुरक्षा स्थिति को देखते हुए देरी जरूरी थी। साथ ही उन्होंने साफ किया कि इस्लामिक नियमों के मुताबिक खामेनेई के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ सुरक्षित रखा गया।
केमिकल नहीं, कोल्ड स्टोरेज का हुआ इस्तेमाल
आमतौर पर मौत के कुछ घंटों बाद ही बॉडी खराब होने लगती है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी था कि चार महीने तक खामेनेई की बॉडी को कैसे संभाला गया। बताया गया कि इसमें किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं हुआ। बॉडी को सिर्फ कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था।
ईरान ने आधिकारिक तौर पर नहीं बताया कि इतने महीनों तक पार्थिव शरीर कहां रखा गया। लेकिन एक ईरानी अधिकारी ने पुष्टि की कि बॉडी को धार्मिक और कानूनी नियमों के हिसाब से पूरे सम्मान के साथ रखा गया था।
यूरो न्यूज ने अंतिम संस्कार मुख्यालय के प्रवक्ता इमान अत्तरजादेह के हवाले से लिखा, "शरीर को इस्लामी और कानूनी स्टैंडर्ड के मुताबिक पूरी देखभाल के साथ रखा गया है। उन्हें न तो दफनाया गया था और न ही किसी ट्रस्ट में रखा गया था।"
शिया कानून में है छूट
इस्लाम में जल्द दफनाने का नियम है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि खामेनेई की बॉडी को रेफ्रिजेरेटेड कोल्ड स्टोरेज में रखा गया होगा। काउंटरटेररिज्म एक्सपर्ट डॉ. उमर मोहम्मद ने फॉक्स न्यूज को बताया, "इस्लाम केमिकल एम्बामिंग की इजाजत नहीं देता। शिया कानून खास हालात में देर से दफनाने और ठंड में रखने की छूट देता है। सुप्रीम लीडर के लिए मौलवी से छूट मिलना आसान है।"
दो करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद
3 जुलाई से 9 जुलाई तक चलने वाला अंतिम संस्कार ईरान और इराक के पांच शहरों में होगा। उम्मीद है कि इसमें करीब दो करोड़ लोग शामिल होंगे। 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल भी इस ऐतिहासिक विदाई में पहुंचेंगे।
तेहरान में शोक की शुरुआत ‘ग्रैंड मोसल्ला’ में विदेशी मेहमानों के समारोह से हुई। खामेनेई के ताबूत को इमाम हुसैन की दरगाह पर फहराए गए पवित्र झंडे से ढका गया है। खामेनेई का परिवार अपना वंश इमाम हुसैन से जोड़ता है। ईरानी सरकार के मुताबिक, सफेद अक्षरों वाला यह लाल झंडा प्रतिरोध, बलिदान और सत्य के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।


