पाकिस्तान की धमकी पर भारत का करारा जवाब, सिंधु जल समझौते पर रुख किया स्पष्ट

विदेश मंत्रालय का यह बयान पाकिस्तान के मंत्री मुसादिक मलिक के उस बयान के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद उन हाथों को "काट देगा" जो संधि के तहत पाकिस्तान के पानी पर दावा करने की कोशिश करेंगे।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: पाकिस्तान की चेतावनी के बाद भारत ने शुक्रवार को एक बार फिर साफ कर दिया कि सिंधु जल संधि पर उसका रुख बदला नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने के पक्के और भरोसेमंद कदम नहीं उठाता, तब तक यह संधि रुकी रहेगी।  

MEA ने दोहराई शर्त   

मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "सिंधु जल संधि पर भारत का रुख पहले जैसा ही है। पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, इसलिए IWT रुकी हुई है। पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए अपना समर्थन भरोसेमंद और पक्के तौर पर छोड़ना होगा।"  

पाकिस्तान की धमकी क्या थी?   

विदेश मंत्रालय का यह बयान पाकिस्तान के मंत्री मुसादिक मलिक के उस बयान के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद उन हाथों को "काट देगा" जो संधि के तहत पाकिस्तान के पानी पर दावा करने की कोशिश करेंगे।  

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी सरकार का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी है। इसे एकतरफा तरीके से रोका या बदला नहीं जा सकता।  

कब और क्यों रोकी गई संधि?   

विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर हुए थे। नौ साल की बातचीत के बाद यह संधि भारत-पाकिस्तान के बीच नदियों के बंटवारे और प्रबंधन के लिए हुई थी।  

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं में सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला भी शामिल था। भारत ने साफ कहा था कि पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन दे रहा है, इसलिए संधि निलंबित की गई।  

तीस्ता नदी परियोजना पर भारत का रुख  

तीस्ता नदी परियोजना को लेकर पूछे गए सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश को भारत की विकास सहायता आपसी सहमति वाले रोडमैप पर आधारित है। इसकी नियमित समीक्षा होती रहती है।  

उन्होंने बताया कि भारत ने तीस्ता प्रोजेक्ट पर बांग्लादेश को अपनी राय पहले ही दे दी है। भारत इस मुद्दे पर अपना समग्र दृष्टिकोण तय करते समय सभी पहलुओं पर विचार करेगा।

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