होर्मुज स्ट्रेट में संकट के बीच 6 बड़े देशों ने मिलकर बनाई नई रणनीति, जहाजों की सुरक्षा पर फोकस
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और जहाजों पर हमलों के बीच यूरोप और जापान ने सुरक्षा सुनिश्चित करने की पहल की है. इन घटनाओं से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है.

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट इस समय वैश्विक चिंता का कारण बना हुआ है. यहां बढ़ते तनाव ने न सिर्फ क्षेत्रीय शांति को प्रभावित किया है, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डालना शुरू कर दिया है. ऐसे हालात में यूरोप के कई देशों और जापान ने मिलकर बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई हलचल देखने को मिल रही है.
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने एक साथ बयान जारी कर कहा है कि वे इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं. इन देशों ने साफ किया कि वे आपसी सहयोग और समन्वय के जरिए यहां स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश करेंगे. साथ ही उन्होंने ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों की कड़ी आलोचना की और कहा कि इन घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.
ऊर्जा क्षेत्र पर बड़ा असर
हाल के हमलों का असर सीधे ऊर्जा सेक्टर पर पड़ा है. कतर और सऊदी अरब के तेल और गैस संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है. कतर एनर्जी के मुताबिक, उनकी एलएनजी निर्यात क्षमता का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. इसी को देखते हुए इन देशों ने ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और बाजार को स्थिर रखने के लिए अन्य उत्पादक देशों के साथ मिलकर काम करने की बात कही है.
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है. दुनिया के कई देशों के लिए यह लाइफलाइन की तरह है. लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यहां की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है. ईरान पर आरोप है कि उसने व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं का इस्तेमाल किया. इसके चलते इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है और सैकड़ों जहाज बाहर ही फंसे हुए हैं. इसका असर भारत समेत कई देशों की आपूर्ति पर पड़ा है.
बढ़ते तनाव के बीच अपील
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया. इससे कतर और सऊदी अरब के प्रमुख केंद्रों को नुकसान हुआ और उत्पादन में गिरावट आई. इन हालात को देखते हुए यूरोपीय देशों और जापान ने ईरान से तुरंत हमले रोकने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.
वैश्विक स्तर पर खतरे की चेतावनी
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि समुद्री मार्गों में रुकावट और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है. खासकर कमजोर देशों और आम लोगों पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा. इन देशों ने नागरिक ढांचे पर हमलों को तुरंत रोकने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे.
यूरोप और जापान ने संकेत दिया है कि वे सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए भी ठोस कदम उठाएंगे. इसके तहत उत्पादन बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा.


