ब्रिटेन में मंदिर निर्माण को लगा बड़ा झटका, प्रशासन ने जमीन देने से किया इनकार, अन्य धार्मिक स्थलों को मिली हरी झंडी

ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर काउंटी के नॉर्थस्टो शहर में रहने वाले प्रवासी हिंदू समुदाय को एक बड़ा झटका लगा है. इलाके में पहला हिंदू मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र बनाने का उनका बरसों पुराना सपना फिलहाल अधर में लटक गया है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर काउंटी के नॉर्थस्टो शहर में रहने वाले प्रवासी हिंदू समुदाय को एक बड़ा झटका लगा है. इलाके में पहला हिंदू मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र बनाने का उनका बरसों पुराना सपना फिलहाल अधर में लटक गया है. स्थानीय साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने धार्मिक गतिविधियों के लिए आरक्षित करीब 0.25 हेक्टेयर जमीन हिंदू संगठन के बजाय 'नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क' को 999 वर्षों की लीज पर सौंपने का फैसला किया है. दिलचस्प बात यह है कि इस चर्च प्रोजेक्ट में एक मुस्लिम संगठन भी भागीदार है, जिसे नमाज और धार्मिक शिक्षा के लिए अलग स्थान दिया जाएगा. यह लीज बेहद मामूली किराये यानी ‘पेपरकॉर्न रेंट’ पर दी गई है.

अंकों का फेरबदल

प्रवासी हिंदू परिवारों के संगठन 'हिंदू समाज नॉर्थस्टो' (HSN) ने इस भूखंड के लिए मजबूत दावा पेश किया था. संगठन की योजना यहां एक भव्य हिंदू मंदिर, इंटरफेथ सेंटर और वेलनेस सेंटर स्थापित करने की थी, ताकि सभी समुदायों को जोड़ा जा सके. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काउंसिल की मूल्यांकन समिति ने चर्च नेटवर्क के प्रस्ताव को 81 प्रतिशत अंक दिए, जबकि तकनीकी और वित्तीय अनुभव के आधार पर हिंदू संगठन के प्रस्ताव को केवल 65 प्रतिशत अंक मिले. इसी अंतर के कारण चर्च नेटवर्क का आवेदन स्वीकार कर लिया गया.

पूरे काउंटी में एक भी मंदिर नहीं

स्थानीय हिंदुओं में इस फैसले को लेकर गहरी निराशा है. समुदाय का कहना है कि पूरे कैम्ब्रिजशायर में एक भी हिंदू मंदिर नहीं है. त्योहारों और अनुष्ठानों के लिए लोगों को घंटों का सफर तय करके बर्मिंघम या वेम्बली जाना पड़ता है. किराए के सामुदायिक हॉल रातभर के आयोजनों के लिए नहीं मिलते. मजबूरी में भगवान की मूर्तियों को बैग में रखकर लोगों के घरों या गैराज में रखना पड़ता है. जिससे कई बार मूर्तियां क्षतिग्रस्त भी हो जाती हैं.

बच्चों के भविष्य और संस्कृति पर गहराता संकट

एचएसएन की अध्यक्ष अपर्णा निगम-सक्सेना ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि काउंसिल ने आवेदन के समय वित्तीय अनुभव जैसे कड़े तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट नहीं किया था. संगठन अब इस निर्णय के खिलाफ कानूनी अपील पर विचार कर रहा है. मूल रूप से कानपुर से यहां आकर बसे अभिषेक श्रीवास्तव ने भावुक होते हुए कहा कि कभी-कभी उन्हें विदेश आने के अपने फैसले पर अफसोस होता है, क्योंकि उनके 9 और 12 साल के बच्चे उस सांस्कृतिक माहौल से वंचित हैं जो भारत में आसानी से मिल जाता है. वहीं, 16 वर्षीय छात्रा एयवा ने बताया कि उसने ब्रिटेन में कभी पूरी रात चलने वाली महाशिवरात्रि या पारंपरिक हवन नहीं देखा.

मुस्लिम संगठन और चर्च का पक्ष

दूसरी तरफ, नॉर्थस्टो मुस्लिम संगठन के अध्यक्ष जवाद नवाश ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्र में लगभग 200 मुस्लिम परिवार रहते हैं, जिन्हें पांच वक्त की नमाज के लिए स्थायी जगह की सख्त जरूरत थी. वहीं चर्च नेटवर्क का कहना है कि परिसर तैयार होने के बाद नियमों के तहत अन्य धार्मिक व सामाजिक संगठनों को भी गतिविधियां करने की अनुमति दी जाएगी. काउंसिल की सदस्य डॉ. लीसा रेडरप ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि हर आवेदन का मूल्यांकन पहले से तय निष्पक्ष मानकों और वित्तीय क्षमता के आधार पर ही किया गया है.

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