महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी तेज, ड्राफ्ट के लिए जल्द बनेगी विशेषज्ञ समिति
महाराष्ट्र सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. कानून का मसौदा तैयार करने के लिए जल्द ही विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी. महाराष्ट्र सरकार अगले दो सप्ताह के भीतर एक समिति गठित कर सकती है.

मुंबई: महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की तैयारी अब तेज होती दिखाई दे रही है. राज्य सरकार इस दिशा में बड़ा कदम उठाने की योजना बना रही है. जानकारी के अनुसार, यूसीसी से जुड़े कानून का मसौदा तैयार करने के लिए जल्द ही एक विशेष समिति बनाई जाएगी. सरकार का उद्देश्य ऐसा ड्राफ्ट तैयार करना है, जिसके आधार पर भविष्य में राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सप्ताह इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड का मसौदा तैयार करने के लिए अगले दो सप्ताह के भीतर एक समिति गठित कर सकती है. फिलहाल समिति के गठन से जुड़ी औपचारिक तैयारियां चल रही हैं. हालांकि, समिति में किन विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा और उसकी जिम्मेदारियां क्या होंगी, इस पर अंतिम फैसला अभी लिया जाना बाकी है. अधिकारियों का कहना है कि समिति बनने के बाद वह विभिन्न कानूनी पहलुओं का अध्ययन करेगी और राज्य सरकार को एक विस्तृत मसौदा सौंपेगी. इसके बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी.
विधानसभा में सरकार ने पहले ही दिए थे संकेत
इससे पहले राज्य के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में स्पष्ट किया था कि महाराष्ट्र सरकार राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के पक्ष में है. उन्होंने बताया था कि कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी. सरकार का मानना है कि विशेषज्ञों की राय और कानूनी अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया मसौदा आगे की प्रक्रिया को मजबूत आधार देगा.
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए कुछ निजी मामलों में एक समान कानून लागू करना है. इसमें शादी, तलाक, गोद लेने की प्रक्रिया, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषय शामिल होते हैं. वर्तमान समय में अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए इन मामलों में अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं. यूसीसी लागू होने पर इन सभी मामलों में एक ही कानूनी व्यवस्था प्रभावी होगी, जो सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगी.
यूसीसी को क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण?
समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य कानून के सामने सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान जिम्मेदारी देना है. इसके समर्थकों का मानना है कि इससे कानूनी व्यवस्था अधिक एकरूप होगी और नागरिकों के बीच समानता को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा लैंगिक समानता को भी यूसीसी का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है. माना जाता है कि एक समान कानून लागू होने से महिलाओं और पुरुषों के अधिकारों में संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है.
इसी कारण लंबे समय से इस विषय पर चर्चा होती रही है और समय-समय पर इसे लागू करने की मांग भी उठती रही है. यदि महाराष्ट्र में यह कानून लागू होता है, तो शादी, तलाक, गोद लेने, विरासत और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में धर्म या जाति के आधार पर अलग-अलग कानून लागू नहीं होंगे. इन सभी विषयों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे सभी नागरिकों के लिए एक जैसी प्रक्रिया और नियम प्रभावी होंगे.


