शी जिनपिंग ने चुपके से मारा तीर! अमेरिका-ईरान वॉर में चीन को मिले ये 5 शानदार फायदे
इर्रान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का पूरा फायदा चीन ने उठाया है. न ही उसने हथियार दिए और न ही किसी भी प्रकार का युद्ध का हिस्सा बना, लेकिन फिर भी चीन को ये 5 बड़े फायदे हाथ लगे हैं.

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में चीन ने कोई सीधा रोल नहीं निभाया. न तो उसने हथियार दिए और न ही सैनिक भेजे. फिर भी चुपचाप बैठे-बैठे चीन को कई बड़े फायदे हो गए. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हालात को ध्यान से देखा और अमेरिका की व्यस्तता का पूरा फायदा उठाया. बिना एक गोली चलाए चीन ने अपनी स्थिति कई मोर्चों पर मजबूत कर ली. आइए जानते हैं उसके 5 प्रमुख फायदे.
1. अमेरिकी हथियारों की जानकारी हासिल की
युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपने आधुनिक हथियारों जैसे JASSM-ER मिसाइल, टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, पैट्रियट और THAAD एंटी-मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया. इससे अमेरिका का हथियारों का स्टॉक काफी कम हो गया. चीन ने पूरे युद्ध को करीब से देखा.
उसने समझा कि अमेरिका AI और ड्रोन का कैसे इस्तेमाल करता है और महंगे डिफेंस सिस्टम को सस्ते ड्रोन कैसे कमजोर कर सकते हैं. यह जानकारी चीन के लिए बहुत कीमती है, खासकर ताइवान जैसे भविष्य के तनाव में इसका फायदा उठाया जा सकता है.
2. ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत स्थिति बनी रही
हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई. कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन चीन पहले से तैयार था. चीन सोलर, विंड, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों की सप्लाई चेन में दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी है.
वह अपनी 85% ऊर्जा जरूरतें खुद पूरा करता है और उसके पास तेल का अच्छा भंडार है. उसका कुल ऊर्जा खपत का 20% से ज्यादा हिस्सा रिन्यूएबल और न्यूक्लियर स्रोतों से आता है. इस वजह से संकट के बावजूद चीन की स्थिति दूसरों से ज्यादा मजबूत रही.
3. कूटनीतिक छवि में सुधार हुआ
अमेरिका आक्रामक बयानबाजी करता रहा, जबकि चीन शांत रहा. उसने पाकिस्तान के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की कोशिश की. इससे कई देशों में चीन को स्थिर और भरोसेमंद ताकत के रूप में देखा जा रहा है. अमेरिका के सहयोगी देशों को भी यह एहसास हुआ कि संकट के समय अमेरिका हमेशा साथ नहीं दे पाता. चीन की यह शांत छवि उसके वैश्विक प्रभाव को बढ़ा रही है.
4. AI और टेक्नोलॉजी में बढ़त मिली
युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुए. पश्चिमी कंपनियों का निवेश रुक गया या जोखिम में पड़ गया. चीन के पास पहले से ही मजबूत AI इंफ्रास्ट्रक्चर है. वह बिना किसी बाहरी मदद के आगे बढ़ सकता है और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी AI कंप्यूटिंग क्षमता रखता है. इस मौके का फायदा उठाकर चीन टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अपनी बढ़त और मजबूत कर रहा है.
5. रेयर अर्थ मिनरल्स पर नियंत्रण बढ़ा
आधुनिक हथियारों और टेक्नोलॉजी में रेयर अर्थ मिनरल्स बहुत जरूरी होते हैं. चीन दुनिया की 70% माइनिंग और 90% प्रोसेसिंग को नियंत्रित करता है. अमेरिका ने जितने ज्यादा हथियार इस्तेमाल किए, उतनी ही उसकी चीन पर निर्भरता बढ़ती गई. इससे चीन को रणनीतिक लाभ मिला.


