नोएडा हिंसा: आंदोलन की आड़ में बवाल की साजिश, सामने आया पूरा ‘ब्लूप्रिंट’
नोएडा में मजदूरों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के पीछे पहले से रची गई साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें कई संगठनों की भूमिका सामने आई है. पुलिस ने मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को गिरफ्तार कर लिया है और अब फंडिंग व नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जांच जारी है.

नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों के हालिया आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा को लेकर अब जांच एजेंसियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी, जिसकी तैयारी महीनों पहले से की जा रही थी. अलग-अलग संगठनों के माध्यम से लोगों को जोड़कर एक बड़े आंदोलन का रूप दिया गया और उसी की आड़ में हालात बिगाड़ने की रणनीति बनाई गई.
मुख्य आरोपी तमिलनाडु से गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है. वह जून 2025 से नोएडा में रह रहा था और इससे पहले गुरुग्राम में ठिकाना बनाए हुए था. नोएडा में उसने किराए पर फ्लैट लेकर उसे पूरी साजिश का केंद्र बना लिया था. जांच के मुताबिक, इसी स्थान से पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था.
आदित्य आनंद की पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में है. उसने लेबर स्टडी में एमए किया है और दिल्ली के हंसराज कॉलेज से पढ़ाई की है. वह खुद को एक आईटी कंपनी से जुड़ा बताता था और अच्छी आय होने के कारण इस गतिविधि में आर्थिक सहयोग भी कर रहा था. जांच में यह भी सामने आया है कि 2022 में कैंपस प्लेसमेंट के दौरान उसकी कुछ कट्टर वामपंथी समूहों से नजदीकियां बढ़ीं, जिसके बाद वह इस नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बन गया.
एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे मामले में चार प्रमुख संगठनों आरडब्ल्यूपीआई, मजदूर बिगुल दस्ता, नौजवान भारत सभा और दिशा ऑर्गनाइजेशन के बीच आपसी तालमेल के संकेत मिले हैं. ये सभी संगठन एक साझा योजना के तहत काम कर रहे थे और 2022 से ही इस दिशा में गतिविधियां चल रही थीं.
नोएडा के अरुण विहार इलाके में छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनमें पूरी योजना का विस्तृत खाका मौजूद है. इन दस्तावेजों में यह तक लिखा गया है कि कब और कहां लोगों को इकट्ठा करना है, प्रदर्शन को किस तरह आगे बढ़ाना है और सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए भीड़ को कैसे संगठित करना है.
जांच में क्या सामने आया?
जांच में यह भी सामने आया है कि मानेसर, करावल नगर और नोएडा को जोड़ते हुए चरणबद्ध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी. फरवरी से बड़े स्तर पर हड़ताल की तैयारी थी, जिसका उद्देश्य केवल मजदूरों की मांगें उठाना नहीं, बल्कि सड़कों को जाम कर प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करना था. मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में इस साजिश को अंतिम रूप दिया गया और इसे मई 2026 तक जारी रखने की रणनीति बनाई गई थी.
फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग, संभावित विदेशी संबंधों और युवाओं की भर्ती के तरीकों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं. पुलिस इस साजिश से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुटी है.


