प्रशांत महासागर में चीन का परमाणु मिसाइल टेस्ट, अमेरिका ने जारी की बड़ी चेतावनी
प्रशांत महासागर में चीन द्वारा परमाणु-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के हाल ही के परीक्षण ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. इस परीक्षण पर कड़ा रुख अपनाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने गहरी चिंता व्यक्त की है.

नई दिल्ली: प्रशांत महासागर में चीन द्वारा परमाणु-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के हाल ही के परीक्षण ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. इस परीक्षण पर कड़ा रुख अपनाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका ने गहरी चिंता व्यक्त की है. वॉशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि वह अपने सहयोगियों और रणनीतिक साझेदारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इसके साथ ही अमेरिका ने बीजिंग से अपील की है कि वह परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए सार्थक नियंत्रण वार्ताओं का हिस्सा बने.
विवाद कैसे शुरू हुआ
यह विवाद तब शुरू हुआ जब चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना ने सोमवार को प्रशांत महासागर में एक परमाणु-संचालित पनडुब्बी से डमी वॉरहेड से लैस लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. चीनी रक्षा मंत्रालय ने इसे एक नियमित अभ्यास का हिस्सा बताया है.
अमेरिका ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रशांत महासागर के दक्षिणी हिस्से में चीनी पनडुब्बी से दागी गई निशस्त्र अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण की बारीकी से निगरानी की है. पिगॉट ने बीजिंग की नीतियॉं पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां एक तरफ पूरी दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए ऐतिहासिक प्रयास कर रही है, वहीं चीन इसके बिल्कुल विपरीत दिशा में कदम बढ़ा रहा है. अमेरिकी प्रवक्ता ने चीन के सैन्य विस्तार को 'अपारदर्शी' करार देते हुए कहा कि बीजिंग द्वारा बिना स्पष्ट जानकारी के किया जा रहा यह तीव्र परमाणु आधुनिकीकरण पूरे क्षेत्र और वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय है.
सुरक्षा परिषद के नियमों की याद दिलाई
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के बीच हुए समझौतों का हवाला देते हुए चीन को उसके दायित्व याद दिलाए. वॉशिंगटन ने मांग की है कि चीन सभी प्रकार के अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की नियमित और समयबद्ध जानकारी साझा करने की व्यवस्था का पालन करे, जैसा कि अन्य P5 देश करते आए हैं.
चीन ने बताया नियमित सैन्य अभ्यास
दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को खारिज करते हुए चीन ने अपने इस कदम का बचाव किया है. चीनी नौसेना के अनुसार, यह प्रक्षेपण उनके वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक सामान्य हिस्सा था. बीजिंग का दावा है कि यह परीक्षण पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और स्थापित वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप था, और इसका उद्देश्य किसी विशेष देश या क्षेत्र को निशाना बनाना नहीं था. चीन ने यह भी कहा कि संबंधित देशों को इस लॉन्चिंग के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था, हालांकि चीनी प्रशासन ने मिसाइल के सटीक नाम या उसकी मारक क्षमता का खुलासा नहीं किया है.


