ईरान और लेबनान को नई मानवीय सहायता देगा चीन, मध्य पूर्व में शांति प्रयासों पर भी जोर

चीन ने युद्ध प्रभावित ईरान और लेबनान को नई मानवीय सहायता भेजने और क्षेत्र में शांति बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की घोषणा की है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी संघर्षों और मानवीय संकट के बीच चीन ने ईरान और लेबनान के लिए नई सहायता भेजने का ऐलान किया है. बीजिंग का कहना है कि युद्ध और अस्थिरता से प्रभावित लोगों की मदद के लिए वह जल्द ही दोनों देशों को राहत सामग्री और अन्य मानवीय सहायता उपलब्ध कराएगा. इसके साथ ही चीन ने क्षेत्र में शांति बहाली के लिए अपने कूटनीतिक प्रयासों को और मजबूत करने की बात भी कही है.

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क्या कहा? 

बुधवार को आयोजित नियमित प्रेस वार्ता में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन निकट भविष्य में ईरान और लेबनान के पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग देने के लिए सहायता की नई खेप भेजेगा. उन्होंने कहा कि युद्ध से प्रभावित आम नागरिकों को राहत पहुंचाना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है और चीन इस दिशा में लगातार योगदान देता रहेगा. हालांकि, उन्होंने सहायता की मात्रा या उसके स्वरूप से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की.

चीनी अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब बीजिंग ने संघर्षग्रस्त देशों की मदद का फैसला किया हो. इससे पहले भी चीन कई देशों को आपातकालीन राहत सामग्री और वित्तीय सहायता प्रदान कर चुका है. मार्च 2026 में चीन ने ईरान समेत विभिन्न प्रभावित देशों के लिए एक विशेष मानवीय सहायता पैकेज जारी किया था.

इसी दौरान चीन ने उस हमले के पीड़ितों के लिए भी आर्थिक मदद की घोषणा की थी, जिसमें ईरान के एक प्राथमिक विद्यालय को निशाना बनाया गया था. उस घटना में कई बच्चों और नागरिकों की जान चली गई थी, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और निंदा देखने को मिली थी.

चीन ने स्पष्ट किया कि वह केवल राहत सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाएगा. विदेश मंत्रालय का कहना है कि बातचीत और कूटनीति ही ऐसे संघर्षों का स्थायी समाधान निकाल सकती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी 

उधर, G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही शांति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि मौजूदा समझौता अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है. उन्होंने संकेत दिया कि यदि प्रस्तावित समझौते की शर्तें अमेरिका के हितों के अनुरूप नहीं रहीं तो सैन्य विकल्प पर फिर से विचार किया जा सकता है.

ट्रंप के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है. वहीं अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक शांति समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं.

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