नई दिल्ली: अमेरिका से निर्वासित होकर अपने देश लौटे वेनेजुएला के दर्जनों लोगों ने शायद ही सोचा होगा कि घर वापसी के कुछ ही घंटों बाद उन्हें जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ेगा. कराकस पहुंचने के बाद जिन लोगों को अस्थायी रूप से एक होटल में ठहराया गया था, वही होटल कुछ देर बाद आए दो भीषण भूकंपों में ढह गया. इस हादसे में कई लोग मलबे में दब गए. कुछ लोग किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई. वेनेजुएला सरकार के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1,700 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है.
मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स फर्स्ट' की पहल आईईसी फ्लाइट मॉनिटर के मुताबिक, बुधवार को मियामी से कराकस पहुंची एक निर्वासन उड़ान में 146 वेनेजुएलावासी सवार थे. इनमें 19 महिलाएं और सात बच्चे भी शामिल थे. देश लौटने के बाद सरकार ने सभी यात्रियों को एक होटल में अस्थायी रूप से ठहराया था. योजना थी कि अगले दिन उन्हें उनके गृह क्षेत्रों के लिए रवाना किया जाएगा, लेकिन उससे पहले ही प्रकृति का कहर टूट पड़ा.
निर्वासितों को होटल सैंटुआरियो ला ललानाडा में ठहराया गया था. इसी दौरान 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए, जिन्होंने होटल सहित आसपास के कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया. ला गुआइरा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल रहा. कई इमारतें ढह गईं और होटल भी कुछ ही पलों में मलबे में तब्दील हो गया. बचाव दल लगातार लोगों को बाहर निकालने में जुटा रहा.
58 वर्षीय लिस्बेथ पोर्टिलो उन लोगों में थीं जो किसी तरह मलबे से बाहर निकलने में सफल रहीं. उन्होंने बताया कि वह रेंगते हुए बाहर आईं और करीब 20 अन्य लोगों के साथ मदद की तलाश में निकल पड़ीं. उन्होंने बताया कि वे कई किलोमीटर तक पैदल चलते रहे. रास्ते में हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था. कई लोग बिना जूते-चप्पल और बिना पर्याप्त कपड़ों के जान बचाने के लिए भाग रहे थे. आखिरकार वे नेशनल गार्ड के एक केंद्र तक पहुंचे, जहां से अपने परिवार से संपर्क कर सके.
पोर्टिलो ने भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्हें जीवन का दूसरा मौका मिला हो. हादसे के बाद भी वह गहरे सदमे में हैं. लिस्बेथ पोर्टिलो उन लोगों में शामिल थीं जिन्हें अमेरिका की आव्रजन कार्रवाई के तहत वापस भेजा गया था. आईईसी फ्लाइट मॉनिटर के अनुसार, अमेरिका ने मई महीने में 38 देशों के लिए कुल 288 निर्वासन उड़ानें संचालित की थीं. इनमें वेनेजुएला के लिए 12 उड़ानें शामिल थीं. लगभग 13 महीने के अंतराल के बाद फरवरी 2025 में वेनेजुएला के लिए निर्वासन उड़ानें दोबारा शुरू हुई थीं.
पोर्टिलो ने बताया कि होटल पहुंचने से पहले सभी यात्रियों की स्वास्थ्य जांच हुई और पहचान संबंधी औपचारिकताएं पूरी की गईं. वह दूसरी मंजिल पर अन्य महिलाओं के साथ ठहरी हुई थीं. भूकंप आने से कुछ देर पहले वह बालकनी में गई थीं. वापस कमरे में लौटते ही तेज झटके महसूस हुए. देखते ही देखते पूरा कमरा हिलने लगा और लोग चीखने लगे. पहले झटके के तुरंत बाद दूसरा और अधिक तेज भूकंप आया. वह एक बीम के नीचे दब गईं, लेकिन लगातार हो रहे कंपन के कारण किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहीं. उनके शरीर पर कई चोटें आईं.
भूकंप से बाहर निकलने के बाद लिस्बेथ पोर्टिलो अपने बच्चों का नंबर याद नहीं कर पा रही थीं, लेकिन उन्होंने किसी तरह अमेरिका में मौजूद अपने पति से संपर्क किया. उन्होंने फोन पर सबसे पहले कहा, "मैं जिंदा हूं. मेरी मदद करो." उनके पति को पहले इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ कि वह इतनी बड़ी तबाही से बच गई हैं. बाद में परिवार के अन्य सदस्य भी उनसे मिलने पहुंच गए.
24 वर्षीय जेनी रोड्रिगेज भी उसी विमान से वेनेजुएला पहुंची थीं. उन्होंने बताया कि हादसे के बाद वह मलबे के नीचे फंस गई थीं. उन्होंने किसी तरह अपना हाथ बाहर निकालकर एक अन्य निर्वासित का ध्यान अपनी ओर खींचा. उसकी मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया. उन्होंने इसे ईश्वर की कृपा बताया.
इस हादसे के बाद कई परिवार अब भी अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं. लिलियाना रोजास ने बताया कि उनके 33 वर्षीय साथी को भी उसी दिन अमेरिका से वेनेजुएला भेजा गया था, लेकिन तब से उनका कोई पता नहीं चल पाया है. उन्हें सिर्फ इतना बताया गया कि उन्हें निर्वासित कर दिया गया है. इसके बाद परिवार को उनकी कोई जानकारी नहीं मिली.
वेनेजुएला सरकार के अनुसार, इस भीषण भूकंप में अब तक 1,700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. बचाव दल अभी भी प्रभावित इलाकों में मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं. उधर, उसी निर्वासन उड़ान से आए कई लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है. उनके परिवार लगातार अधिकारियों से जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. First Updated : Tuesday, 30 June 2026