शांति समझौते से ठीक पहले बेरूत में हुआ हमला, राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू को सुनाई खरी-खोटी, बोले-'तुम्हें जजमेंट भी नहीं है, क्यों किया यह हमला?

अमेरिका और ईरान के बीच बस कुछ ही देर में समझौता होना था, तभी इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरान पर हमला कर दिया. अब इस हमले से राष्ट्रपति ट्रंप ने नाराजगी जताई है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तीखी आलोचना की है. इजरायल ने बेरूत में हमले किए, ठीक उसी समय जब अमेरिका और ईरान मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए एक समझौते पर दस्तखत करने वाले थे. ट्रंप ने इस हमले के टाइमिंग को लेकर बहुत नाराजगी जताई हैं. 

ट्रंप ने समाचार वेबसाइट एक्सियोस को फोन पर बताया, "यह बहुत बुरा था. मुझे यकीन नहीं हो रहा था. हम समझौते पर साइन करने वाले थे, बस एक घंटा बाकी था." उन्होंने कहा कि नेतन्याहू को स्थिति की गंभीरता समझ नहीं आई. ट्रंप ने सीधे नेतन्याहू को अपनी नाराजगी बताई भी.

ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट

इससे पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी लिखा था, "आज सुबह बेरूत पर हुआ हमला नहीं होना चाहिए था, खासकर उस खास दिन जब हम ईरान के साथ शांति समझौते के बहुत करीब थे." ट्रंप ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की. 

उन्होंने कहा कि इजरायल और हिजबुल्लाह दोनों को और हमले नहीं करने चाहिए, लेकिन ईरान ने इजरायल के हमलों का जवाब देने की कसम खाई है. ईरानी सैन्य अधिकारी मोहम्मद जाफर असादी ने कहा कि बेरूत में इजरायली "अपराध" बिना जवाब के नहीं रहेंगे.

हिजबुल्लाह हमले का हवाला

इजरायल ने हिजबुल्लाह के उत्तर इजरायल में रॉकेट दागने के बाद यह कार्रवाई की. ट्रंप का कहना है कि हिजबुल्लाह के हमले से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था. फिर भी इजरायल को हमला नहीं करना चाहिए था. 

समझौते पर अनिश्चितता बनी हुई

ट्रंप ने दावा किया कि समझौता अभी भी ट्रैक पर है और रविवार को साइन हो सकता है, जो उनके 80वें जन्मदिन का दिन भी है. लेकिन ईरान ने कहा है कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. चर्चाएं राजनीतिक, कानूनी और तकनीकी स्तर पर चल रही हैं.

सूत्रों के मुताबिक, ड्राफ्ट समझौते में अमेरिका 25 अरब डॉलर के ईरानी फ्रोजन एसेट्स छोड़ने का वादा कर रहा है. ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए खोलने की बात मान सकता है. ईरान अपना मौजूदा परमाणु कार्यक्रम बनाए रखेगा लेकिन आगे यूरेनियम संवर्धन नहीं बढ़ाएगा. 

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अंतिम समझौते में ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करना होगा और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक हटाना होगा. इजरायल ने साफ कहा है कि वह अमेरिका-ईरान वार्ता का पक्ष नहीं है और लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई का अधिकार रखता है. वहीं ईरान लेबनान में स्थायी सीजफायर को किसी भी बड़े समझौते की शर्त बनाए हुए है.

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