प्रवासियों पर ट्रंप का बड़ा बयान, थर्ड वर्ल्ड वाली टिप्पणी क्यों बनी चर्चा का विषय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में विकासशील देशों से होने वाले आप्रवासन पर सख्त टिप्पणी की, जिसके बाद नई राजनीतिक बहस छिड़ गई. इसी बीच एक अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की कुछ आव्रजन नीतियों को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि कई लोगों के साथ उनके मूल देश के आधार पर भेदभाव किया गया.

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नई दिल्ली: अमेरिका में आप्रवासन नीति को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. इस बार इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक सोशल मीडिया पोस्ट बना है, जिसमें उन्होंने विकासशील देशों से आने वाले प्रवासियों को लेकर विवादित टिप्पणी की है. ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यदि कोई देश बड़ी संख्या में तीसरी दुनिया के देशों से लोगों को अपने यहां बसाता है, तो वह स्वयं भी धीरे-धीरे उसी स्थिति में पहुंच सकता है. उन्होंने अपने संदेश के अंत में एक बार फिर अपने लोकप्रिय राजनीतिक नारे "अमेरिका को फिर से महान बनाओ" का उल्लेख किया.

अमेरिका में गहन राजनीतिक चर्चा

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में अवैध प्रवासन, सीमा सुरक्षा और शरणार्थी नीतियों को लेकर गहन राजनीतिक चर्चा चल रही है. ट्रंप लंबे समय से कड़ी आप्रवासन नीतियों के समर्थक रहे हैं. अपने राजनीतिक अभियान और राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर दीवार निर्माण, अवैध प्रवासियों की वापसी और योग्यता आधारित आव्रजन व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था.

इसी बीच अमेरिकी न्यायपालिका ने ट्रंप प्रशासन की कुछ आप्रवासन नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं. हाल ही में एक संघीय न्यायाधीश ने प्रशासन द्वारा लागू कुछ आव्रजन प्रतिबंधों को अवैध करार देते हुए उन्हें निरस्त कर दिया. अदालत का कहना था कि इन नीतियों के कारण कई देशों के नागरिकों के शरण, वर्क परमिट, ग्रीन कार्ड और नागरिकता से जुड़े आवेदन लंबे समय तक लंबित रखे गए.

न्यायालय ने अपने फैसले में क्या कहा?

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग प्रभावित हुए जिन्होंने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया था, लेकिन फिर भी उनके मामलों पर समय पर निर्णय नहीं लिया गया. अदालत के अनुसार, संबंधित एजेंसी की नीतियों ने कई आवेदकों को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ दिया.

न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के जन्मस्थान या मूल देश के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार करना उचित नहीं माना जा सकता. इस फैसले को आप्रवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों और श्रमिक समूहों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है.

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने कुछ सुरक्षा चिंताओं और आपराधिक घटनाओं का हवाला देते हुए कई देशों के नागरिकों पर यात्रा और आव्रजन संबंधी प्रतिबंध लगाए थे. इनमें अफगानिस्तान, ईरान, सोमालिया, सीरिया, हैती और वेनेजुएला जैसे देश शामिल थे.

ट्रंप के हालिया बयान और अदालत के फैसले ने अमेरिका में आव्रजन नीति को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है. आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता नजर आ सकता है. First Updated : Monday, 15 June 2026

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