Donald Trump Oath: डोनाल्ड ट्रंप, जो अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं, ने अपने शपथ ग्रहण से पहले ही वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. संकेत मिल रहे हैं कि वह पद संभालते ही भारत और चीन का दौरा कर सकते हैं. ट्रंप के इस कदम को वैश्विक समीकरणों को बदलने की दिशा में देखा जा रहा है. ट्रंप ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी समेत कई प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया है. वहीं, चीन ने अपने प्रतिनिधि के तौर पर उपराष्ट्रपति को भेजने की पुष्टि की है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने सलाहकारों से कहा है कि वह शी जिनपिंग से सीधे संवाद स्थापित करना चाहते हैं और चीन की यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने अप्रैल में भारत आने की इच्छा भी जाहिर की है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ इस विषय पर शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीलमेकिंग के लिए पहचाने जाने वाले ट्रंप, भारत और चीन को खास तरजीह देने के मूड में हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य देशों की तुलना में इन दोनों देशों के साथ ट्रंप का संबंध अहम रहेगा. भारत, अमेरिका और अन्य क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी मुलाकात में इन संभावित यात्राओं को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है.
ट्रंप ने अपने प्रचार अभियान के दौरान चीन पर कड़े शुल्क लगाने की बात कही थी। हालांकि, अब वह इन बयानों से जुड़े तनाव को खत्म करने के लिए शी जिनपिंग के साथ संबंध सुधारने पर जोर दे रहे हैं। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप चीन के साथ-साथ भारत के साथ मजबूत साझेदारी बनाने की दिशा में काम करना चाहते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी भी शामिल हुए. वाशिंगटन में आयोजित इस विशेष रात्रिभोज में अंबानी दंपति ने ट्रंप से मुलाकात की. 18 जनवरी को आयोजित इस 'कैंडललाइट डिनर' में दुनिया भर की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं.
ट्रंप के भारत और चीन की ओर रुख से यह साफ है कि उनकी विदेश नीति का फोकस एशिया पर रहेगा. ट्रंप के कदमों को उनकी डीलमेकिंग रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो वैश्विक स्तर पर नए समीकरण बना सकते हैं. First Updated : Monday, 20 January 2025