ईरान की 'नाचती तबाही' का कहर... सेजिल मिसाइल ने क्यों उड़ा दिए अमेरिका-इजरायल के रडार!
ईरान की 'डांसिंग मिसाइल' सेज्जिल-2 दुश्मनों के लिए सिरदर्द बनी हुई है. यह हवा में नाचती-कूदती दिशा बदल लेती है, जिससे आयरन डोम, पैट्रियट और थाड जैसे मिसाइल रक्षा तंत्र भी हैरान रह जाते हैं. 2000 किमी की रेंज, सॉलिड फ्यूल और चालाक मैन्यूवरेबल वॉरहेड के साथ यह कई बार इस्तेमाल हो चुकी है.

ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध में एक नया और खतरनाक हथियार सामने आया है, जिसे दुनिया 'डांसिंग मिसाइल' के नाम से जान रही है. ईरान ने इस युद्ध में पहली बार अपनी उन्नत सेज्जिल-2 बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया, जो हवा में नाचती हुई लक्ष्य की ओर बढ़ती है और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देती है. इस मिसाइल के हमलों से इजरायल के तेल अवीव और अमेरिकी ठिकानों पर भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे दोनों देशों की रक्षा प्रणालियां बुरी तरह चुनौती का सामना कर रही हैं.
ईरान की इस 'अनस्टॉपेबल' मिसाइल ने युद्ध का समीकरण बदल दिया है. सॉलिड फ्यूल से लैस यह मिसाइल जल्दी लॉन्च हो सकती है और मैन्यूवरेबल री-एंट्री व्हीकल की वजह से पैट्रियट, थाड या आयरन डोम जैसे सिस्टम भी इसे रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं. ईरान इसे ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4 के तहत बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है.
सेज्जिल-2 मिसाइल की पूरी स्पेसिफिकेशन
सेज्जिल-2 ईरान की स्वदेशी तकनीक से विकसित दो चरण वाली सॉलिड-फ्यूल मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी लंबाई लगभग 18 मीटर, वजन करीब 23,600 किलो और रेंज 2,000 किलोमीटर तक है. इसमें 700 से 1,000 किलो तक का वॉरहेड लगाया जा सकता है, जो पारंपरिक या परमाणु हो सकता है. मोबाइल लॉन्चर से छोड़ी जाने वाली इस मिसाइल को तैयार करने में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं.
इसे 'डांसिंग मिसाइल' क्यों कहा जाता है?
यह मिसाइल हवा में नाचती हुई चलती है, इसलिए दुनिया इसे 'डांसिंग मिसाइल' कहती है. वायुमंडल में वापस आने पर इसका मैन्यूवरेबल री-एंट्री व्हीकल हाई स्पीड पर दिशा बदलता है. ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं घूमता है. इससे एयर डिफेंस सिस्टम को इंटरसेप्ट करने के लिए सिर्फ कुछ सेकंड का समय मिलता है. इसकी स्पीड लगभग 17,000 किमी/घंटा है, जो इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल बनाती है. ईरानी विशेषज्ञ इसे 'अनस्टॉपेबल' बताते हैं.
ईरान ने इसे कितनी बार इस्तेमाल किया?
ईरान ने मार्च 2026 में ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4 के 54वें और उसके बाद के दौर में सेज्जिल-2 का पहली बार इस्तेमाल किया. पहले हमलों में तेल अवीव और आसपास के इजरायली ठिकानों के साथ अमेरिकी बेस पर यह मिसाइल दागी गई. अब तक कई लहरों में दर्जनों मिसाइलें एक साथ छोड़ी गईं, जिससे कई सैन्य ठिकाने तबाह हो गए. पहले चरण में पुरानी मिसाइलें इस्तेमाल हुईं, लेकिन अब सेज्जिल-2 मुख्य हथियार बन चुकी है.
इस मिसाइल के प्रभाव और नुकसान
सेज्जिल-2 के हमलों से इजरायल के तेल अवीव में विस्फोट हुए, हवाई अड्डे और रडार सिस्टम क्षतिग्रस्त हुए. अमेरिकी बेस पर भी भारी असर पड़ा. इसकी मैन्यूवरेबिलिटी की वजह से 90% से ज्यादा मिसाइलें एयर डिफेंस को चकमा देती हैं. एक मिसाइल की कीमत कम है, लेकिन यह महंगे डिफेंस सिस्टम को बेकार साबित कर देती है, जिससे ईरान का मनोबल बढ़ा है और अमेरिका-इजरायल को बड़ा नुकसान हुआ है.
अमेरिका और इजरायल क्यों असहाय महसूस कर रहे हैं?
अमेरिका के पास पैट्रियट और थाड, जबकि इजरायल के पास आयरन डोम और एरो जैसे उन्नत सिस्टम हैं. लेकिन सेज्जिल-2 की हाई अल्टीट्यूड मैन्यूवरिंग क्षमता इन सबको बेअसर कर देती है. इंटरसेप्शन विंडो सिर्फ कुछ सेकंड की रह जाती है. ईरान ने बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल करके दोनों देशों की डिफेंस को चकमा दिया. अब वे नई तकनीक विकसित करने की कोशिश में हैं, लेकिन फिलहाल यह मिसाइल उनके लिए 'ब्रह्मास्त्र' साबित हो रही है.


