होर्मुज में फंसे भारत के जहाज, जंग के बीच 22 जहाज निकालने की तैयारी तेज, ऊर्जा संकट पर टिकी देश की नजरें

पश्चिम एशिया की जंग ने समुद्री रास्तों पर तनाव बढ़ा दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में भारत के कई जहाज फंसे हैं।सरकार अब 22 जहाजों को सुरक्षित निकालने की तैयारी कर रही है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

पश्चिम एशिया की जंग ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक को संकट में डाल दिया है। होर्मुज स्ट्रेट इस समय तनाव का केंद्र बना हुआ है। यहीं से दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। भारत के कई जहाज भी इसी रास्ते में फंस गए हैं। सरकार अब उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं। रास्ता खुलते ही जहाजों को बाहर निकालने की योजना बनाई जा रही है।

क्या 22 जहाजों को निकालने की तैयारी पूरी हो गई?

मुंबई स्थित डायरेक्टरेट ऑफ शिपिंग ने बताया है कि 22 जहाजों की पहचान कर ली गई है। इन जहाजों को रास्ता साफ होते ही सबसे पहले निकाला जाएगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह तैयारी पहले से की जा चुकी है। जैसे ही हालात सामान्य होंगे, जहाजों को सुरक्षित बाहर लाया जाएगा। इन जहाजों को भारत आना था और इनमें जरूरी ऊर्जा कार्गो भी मौजूद है। इस वजह से सरकार इस ऑपरेशन को प्राथमिकता दे रही है। समुद्री एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं।

क्या भारत ईरान से बातचीत भी कर रहा है?

सरकार इस मामले में कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक भारत ईरान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। करीब 30 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने पर चर्चा चल रही है। इसमें समुद्री रास्ते और सुरक्षा इंतजाम दोनों शामिल हैं। भारत का मकसद यह है कि जहाज बिना किसी खतरे के बाहर निकल सकें। युद्ध के माहौल में यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। समुद्री कूटनीति इस समय बड़ी भूमिका निभा रही है।

क्या खाड़ी क्षेत्र में अभी भी कई जहाज फंसे हैं?

रिपोर्टों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में अभी भी कई जहाज फंसे हुए हैं। करीब 28 जहाज इस समय अलग अलग हिस्सों में रुके हुए बताए जा रहे हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में हैं। बाकी 4 जहाज ओमान की खाड़ी के आसपास के जल क्षेत्र में हैं। युद्ध की वजह से समुद्री आवाजाही पर असर पड़ा है। कई देशों के जहाज भी इसी वजह से रुके हुए हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी चिंता बढ़ गई है।

क्या इन जहाजों में ऊर्जा से जुड़ा बड़ा कार्गो है?

जिन 22 जहाजों की पहचान की गई है, उनमें ऊर्जा से जुड़ा बड़ा कार्गो मौजूद है। इनमें 3 जहाज एलएनजी लेकर आ रहे हैं। 11 जहाजों पर एलपीजी लदा हुआ है।जबकि 8 जहाज कच्चा तेल लेकर चल रहे हैं। अनुमान के मुताबिक इन जहाजों में करीब 2,15,000 मीट्रिक टन एलएनजी है। एलपीजी करीब 4,15,000 मीट्रिक टन बताई जा रही है। इसके अलावा करीब 17,50,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल भी मौजूद है। इन जहाजों के सुरक्षित पहुंचने से ऊर्जा संकट का दबाव कम हो सकता है।

क्या भारतीय नाविकों को भी सुरक्षित निकाला गया है?

सरकारी जानकारी के मुताबिक कई भारतीय नाविकों को भी सुरक्षित निकाला जा चुका है। 12 मार्च तक करीब 215 नाविकों को युद्ध क्षेत्र से बाहर लाया गया। यह अभियान लगातार जारी है। जहां भी भारतीय नागरिक या नाविक फंसे हैं, वहां मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियां और विदेश मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। इस पूरे ऑपरेशन पर सरकार की नजर बनी हुई है।

क्या भारत नौसेना सुरक्षा योजना पर भी काम कर रहा है?

सरकार जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। रिपोर्टों के मुताबिक नौसेना एस्कॉर्ट की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। यानी जरूरत पड़ने पर नौसेना जहाजों को सुरक्षा देकर बाहर निकाल सकती है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच फोन पर बातचीत भी हुई है। विदेश मंत्री स्तर पर भी लगातार संपर्क बना हुआ है। यह साफ है कि भारत इस संकट को कूटनीति और सुरक्षा दोनों स्तर पर संभालने की कोशिश कर रहा है।

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