नई दिल्ली : मध्य पूर्व के युद्ध के बीच एक नया खतरनाक मोड़ आ गया है. अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने साफ कहा है कि सत्ता बदलने की किसी भी कोशिश पर वह अपने बचे हुए प्रभावी मिसाइलों से इजरायल के डिमोना परमाणु केंद्र पर हमला कर सकता है. साथ ही क्षेत्र के सभी ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है. ईरान के पास परमाणु बम नहीं है लेकिन डिमोना पर हमला रेडियोएक्टिव लीक से परमाणु बम जैसी तबाही मचा सकता है. इस बयान से दुनिया में हड़कंप मच गया है.
आपको बता दें कि इजरायल का यह परमाणु केंद्र नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर से मात्र 13 किलोमीटर दूर है. 1958 में फ्रांस की गुप्त मदद से बना यह रिएक्टर 1962 में सक्रिय हुआ. इजरायल ने शुरू में इसे कपड़ा फैक्ट्री बताया लेकिन बाद में टेक्नीशियन के खुलासे से राज खुल गया. आज तक इजरायल परमाणु हथियार रखने की पुष्टि नहीं करता लेकिन विशेषज्ञ इसे 9 परमाणु शक्ति संपन्न देशों में गिनते हैं.
यहां अब तक करीब 800 किलोग्राम हथियार ग्रेड प्लूटोनियम बन चुका है. छह दशक का परमाणु कचरा और रेडियोएक्टिव सामग्री भी जमा है. जून 2025 की SIPRI रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के पास 90 से ज्यादा परमाणु वारहेड हो सकते हैं. इनमें 30 ग्रेविटी बम और 50 जेरिको-2 मिसाइलें शामिल हैं. भविष्य में 200 वारहेड बनाने की क्षमता भी बताई गई है. आसपास का हवाई क्षेत्र पूरी तरह बंद रहता है.
मिसाइल लगने पर परमाणु विस्फोट नहीं होगा लेकिन रेडियोएक्टिव धुआं फैल जाएगा. 2008 की एक स्टडी के मुताबिक यह धुआं पहले डिमोना शहर फिर पूरे इजरायल और तटीय इलाकों तक पहुंच सकता है जहां 50 लाख लोग रहते हैं. दो लाख लोगों को तुरंत 30 किलोमीटर दूर हटाना पड़ सकता है. 2500 से 3000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लंबे समय तक रहने लायक नहीं रहेगा.
सबसे खतरनाक प्लूटोनियम-239 है जिसकी उम्र हजारों साल है. छोटे कण शरीर में घुसकर फेफड़ों हड्डियों और लीवर में जमा हो जाते हैं. यह कैंसर का बड़ा कारण बनता है और कभी निकाला नहीं जा सकता. चेर्नोबिल में रिएक्टर डिजाइन की गलती से 5 प्रतिशत रेडियोएक्टिव हिस्सा फैला था लेकिन डिमोना में प्लूटोनियम लीक सदियों तक खतरा बनाए रखेगा.
ईरान सैचुरेशन अटैक पर भरोसा करता है. पहले ड्रोन फिर क्रूज और अंत में बैलिस्टिक मिसाइलें दागता है. 2024 में उसने इजरायल पर 200 मिसाइलें छोड़ीं. जून 2025 में 550 मिसाइलों की खबर आई. इजरायल का एयर डिफेंस मजबूत है लेकिन करीब 25 प्रतिशत मिसाइलें 2024 के हमले में घुसने में सफल रहीं.
इस धमकी से जॉर्डन मिस्र और खाड़ी देशों में दहशत फैल गई है. जॉर्डन और मिस्र ने आपात बैठकें बुलाईं. अगर रेडियोएक्टिव स्मोक फैला तो खेती आबादी और समुद्री रास्ते प्रभावित होंगे. यूएई सऊदी अरब और बहरीन पहले ही तेल ठिकानों पर हमले झेल चुके हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि बिना परमाणु बम के भी ईरान परमाणु स्तर की तबाही मचा सकता है जो सैकड़ों साल तक रहेगी. First Updated : Wednesday, 11 March 2026