जंग की कीमत चुका रहे अमेरिकी नागरिक, महंगाई ने तोड़ी कमर, पेट्रोल-डीजल महंगा

ईरान-अमेरिका तनाव के कारण अमेरिका में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे महंगाई और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ गई है. इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है, जहां कंपनियां सरचार्ज लगा रही हैं और एयरलाइंस ने टिकट महंगे कर दिए हैं.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब अमेरिका की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है. सबसे ज्यादा दबाव ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण महसूस किया जा रहा है. पेट्रोल और डीजल दोनों ही महंगे हो गए हैं, जिससे परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों की लागत तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि महंगाई का असर अब सीधे आम नागरिकों तक पहुंच चुका है. जेट फ्यूल की कीमतों में भी भारी उछाल आया है, जिसने हवाई यात्रा को महंगा बना दिया है.

अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़ी 

अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 4.09 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो पिछले कुछ वर्षों के उच्च स्तरों में से एक है. वहीं डीजल की कीमत भी एक साल पहले के मुकाबले काफी बढ़कर 5.53 डॉलर प्रति गैलन हो गई है. डीजल का उपयोग खेती, निर्माण और ट्रांसपोर्ट जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है. इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का असर व्यापक स्तर पर देखा जा रहा है.

बढ़ती लागत का असर बड़े कॉरपोरेट सेक्टर पर भी पड़ा है. ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन ने 17 अप्रैल से अपने थर्ड-पार्टी विक्रेताओं पर 3.5 फीसदी का अतिरिक्त ईंधन और लॉजिस्टिक्स शुल्क लगाने का फैसला किया है. कंपनी का कहना है कि अब तक वह बढ़ी हुई लागत को खुद वहन कर रही थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा करना संभव नहीं है. इसी तरह अमेरिकी डाक सेवा ने भी पार्सल और एक्सप्रेस डिलीवरी पर अस्थायी ईंधन सरचार्ज लगाने की तैयारी की है. इसके अलावा, अन्य लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने भी अपने शुल्क बढ़ा दिए हैं.

हवाई यात्रा भी इससे अछूती नहीं रही। जेट ईंधन महंगा होने के कारण एयरलाइंस ने टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद यात्रियों की मांग में खास कमी नहीं आई है.

क्या है संकट की बड़ी वजह? 

इस पूरे संकट की एक बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुआ तनाव है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है. आर्थिक जानकारों ने चेतावनी दी है कि परिवहन लागत बढ़ने से अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ेंगी, जिससे महंगाई और तेज हो सकती है.

फिलहाल अमेरिका में महंगाई दर अपेक्षाकृत नियंत्रित दिख रही थी, लेकिन तेल की कीमतों में उछाल और युद्ध के असर से इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई 4 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंच सकती है, जिससे आम लोगों के लिए आर्थिक चुनौतियां और बढ़ जाएंगी.

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