मध्यस्थ या पक्षधर? ईरान ने पाकिस्तान की भूमिका पर उठाया बड़ा सवाल
ईरान के सांसद ने पाकिस्तान पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उसे अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए अविश्वसनीय मध्यस्थ बताया. वहीं, बातचीत जारी रखने की कोशिशों के बीच डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि पहल अब ईरान को खुद करनी होगी.

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और किसी संभावित समझौते की कोशिशों के बीच अब पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. हाल ही में ईरान के एक वरिष्ठ सांसद ने इस्लामाबाद की मध्यस्थता क्षमता पर खुलकर नाराजगी जताई और उसे पक्षपाती करार दिया है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति में नई बहस छिड़ गई है.
इब्राहिम रजाई ने क्या कहा?
ईरान की संसद से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी मध्यस्थ का निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है, लेकिन पाकिस्तान इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अक्सर डोनल्ड ट्रंप के हितों को प्राथमिकता देता है और अमेरिका के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखने से बचता है.
इब्राहिम रजाई ने यह भी कहा कि पाकिस्तान भले ही ईरान का पड़ोसी और मित्र देश हो, लेकिन बातचीत के लिए उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक, पहले अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में वह अपने वादे से पीछे हट गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की.
ईरानी सांसद ने क्या कहा?
ईरानी सांसद ने आगे कहा कि अमेरिका ने लेबनान और जब्त की गई संपत्तियों से जुड़े मुद्दों पर भी कई आश्वासन दिए थे, लेकिन वे पूरे नहीं किए गए. ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका एक निष्पक्ष मध्यस्थ की बजाय झुकी हुई नजर आती है, जो किसी एक पक्ष के हितों को साधती दिखती है.
इसी बीच, बातचीत को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल के दिनों में कूटनीतिक गतिविधियों में काफी सक्रिय रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान का दौरा कर वहां के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की.
ओमान क्यों पहुंचे थे अराघची?
इससे पहले अराघची ओमान भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और अन्य अहम कूटनीतिक मुद्दों पर चर्चा की. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन वार्ताओं में परमाणु कार्यक्रम के अलावा समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नए कानूनी ढांचे, मुआवजे और अमेरिका द्वारा लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों को हटाने जैसे अहम विषय भी शामिल हैं.
हालांकि, बातचीत की प्रक्रिया में सुस्ती नजर आ रही है. इसी बीच डोनल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि अगर ईरान बातचीत को आगे बढ़ाना चाहता है, तो उसे खुद पहल करनी होगी. यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका ने पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता को रद्द कर दिया है, जिससे पूरे मामले की जटिलता और बढ़ गई है.


