कतर पर हमला, सऊदी से बढ़ी दूरी! क्या खुद को दुनिया से अलग कर रहा है ईरान

जंग में आमतौर पर दो तरह के देश होते हैं। एक जो हथियार चलाते हैं, दूसरे जो बातचीत की मेज लगाते हैं। पश्चिम एशिया की मौजूदा लड़ाई में कतर, ओमान और पाकिस्तान अब तक अमेरिका और ईरान के बीच पुल बन रहे थे।

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नई दिल्ली: जंग में आमतौर पर दो तरह के देश होते हैं। एक जो हथियार चलाते हैं, दूसरे जो बातचीत की मेज लगाते हैं। पश्चिम एशिया की मौजूदा लड़ाई में कतर, ओमान और पाकिस्तान अब तक अमेरिका और ईरान के बीच पुल बन रहे थे। लेकिन अब ये तस्वीर तेजी से बदल रही है और ईरान अपने ही मध्यस्थों को दूर कर रहा है।  

कतर: अब निशाने पर है बातचीत का पुल    

खाड़ी में कतर की भूमिका हमेशा अलग रही है। एक तरफ वहां अमेरिका का सबसे बड़ा बेस अल-उदीद है, दूसरी तरफ उसने सालों तक ईरान से संवाद बनाए रखा। जब भी तनाव बढ़ा, दोहा ही बातचीत का रास्ता बनता था।  

लेकिन इस बार वही कतर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बन गया है। तेहरान कहता है कि उसका टारगेट अमेरिकी ठिकाने थे, कतर नहीं। मगर कतर इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। हमलों के बाद उसने अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग और बढ़ाने का ऐलान कर दिया। यानी जो देश मध्यस्थ था, वो अब खुद जंग में खिंचता दिख रहा है।  

दोहरी भूमिका में फंसा पाकिस्तान   

कतर के बाद सबसे ज्यादा दबाव पाकिस्तान पर है। शहबाज-मुनीर की जोड़ी ने पिछले महीनों में अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की कोशिश की थी। लेकिन इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर फिर हमले शुरू कर दिए। पाकिस्तान और सऊदी के बीच गहरे रक्षा संबंध हैं। समझौते के तहत अगर सऊदी पर हमला होता है तो इस्लामाबाद को उसके बचाव में उतरना पड़ेगा।

विदेश मंत्री इशाक डार ने संसद में साफ कहा कि पाकिस्तान-सऊदी समझौते को ईरान याद रखे। उन्होंने सऊदी की सुरक्षा को अपनी सुरक्षा बताया और सभी पक्षों से संयम की अपील की। अब पाकिस्तान मध्यस्थ भी बना रहना चाहता है और सऊदी का रणनीतिक साझेदार भी। ये बैलेंस साधना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा है।  

ईरान का मकसद क्या है?    

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पूरे खाड़ी को ये संदेश देना चाहता है कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो असर सिर्फ अमेरिका या इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा। इसी रणनीति के तहत वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बढ़ा रहा है। उसकी कोशिश है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज उसकी शर्तों पर चलें। लेकिन इसका उल्टा असर भी हो सकता है।

अगर कतर, ओमान जैसे देश खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे तो वो अमेरिका के और करीब जाएंगे। ओमान ने ही UN के साथ मिलकर होर्मुज में शिपिंग कॉरिडोर बनाया था। आरोप है कि ईरान ने उस कॉरिडोर से गुजरने वाले जहाजों पर भी हमले किए। ओमान ने चेतावनी देकर हमले रोकने को कहा है। यानी जिस दबाव से ईरान दुश्मनों को रोकना चाहता है, वही रणनीति उसके खिलाफ एक नया क्षेत्रीय गठबंधन खड़ा कर सकती है।   First Updated : Friday, 17 July 2026