ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना, अब क्या मध्य पूर्व से सेना हटाएगा अमेरिका?
ईरान के बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती की समीक्षा कर रहा है और कुछ बेस स्थानांतरित करने पर विचार कर सकता है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. हाल ही में दोनों देशों के बीच शांति समझौते की खबरों के बावजूद हमलों का सिलसिला जारी है. ईरान द्वारा ओमान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाए जाने के बाद हालात और बिगड़ गए. इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के ड्रोन, मिसाइल और रडार ठिकानों पर कार्रवाई की. इसके बाद ईरान ने बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया.
अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुआ नुकसान
रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे समेत करीब 20 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया. हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर नुकसान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कई रिपोर्टों में सैन्य ठिकानों को भारी क्षति होने का दावा किया गया है.
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे हमलों के संकेत
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचने के संकेत मिले हैं. राहत की बात यह रही कि इन हमलों में किसी अमेरिकी सैनिक की मौत नहीं हुई, लेकिन सैन्य ढांचे को हुए नुकसान ने अमेरिका की रणनीति पर असर डाला है.
बदल सकती है अमेरिका की सैन्य तैनाती
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका अब मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी की समीक्षा कर रहा है. संभावना जताई जा रही है कि सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों में मौजूद कुछ सैन्य ठिकानों को ऐसे इलाकों में स्थानांतरित किया जा सकता है, जो ईरानी मिसाइलों की पहुंच से बाहर हो. हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है.
ट्रंप पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
इस बीच अमेरिका में भी ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे के पुनर्निर्माण पर करीब 40 करोड़ डॉलर तक खर्च आ सकता है. इसी बीच अमेरिकी सीनेट ने युद्ध रोकने से जुड़ा एक प्रस्ताव भी पारित किया, जिसे कुछ रिपब्लिकन सांसदों का भी समर्थन मिला.
हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए इसे गलत समय पर उठाया गया कदम बताया. उन्होंने कहा कि इससे उनकी रणनीति पर असर पड़ सकता है, लेकिन अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा.


