नई दिल्ली: तेहरान में महीनों से जारी भारी विरोध प्रदर्शनों के बावजूद ईरान का इस्लामिक शासन सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए हुए है. इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सरकार ने सख्त और दमनकारी रवैया अपनाया, जिसमें हजारों लोगों की जान जाने की खबरें सामने आईं. कुछ रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 12 हजार से अधिक बताई जा रही है.
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विद्रोह को बेरहमी से दबाने के बाद ईरान का कट्टरपंथी नेतृत्व अब पहले से कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है. खासकर ऐसे समय में, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व के प्रति अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं. ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की कथित योजना को वापस ले लिया है.
विश्लेषकों का मानना है कि अंदरूनी विरोध से डरा ईरानी नेतृत्व अब एक बड़े और निर्णायक टकराव की तैयारी में जुट गया है. ब्रिटिश मीडिया आउटलेट द सन ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु हथियार कार्यक्रम को लगातार तेज़ कर रहा है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, पिछले साल जून में ईरान की परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी हमले के बावजूद तेहरान का अधिकांश परमाणु सामग्री सुरक्षित बची रही. रिपोर्ट में कहा गया है कि संशोधित यूरेनियम की मात्रा लगभग आधा टन है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान भविष्य में इजरायल पर करीब 2000 मिसाइलों से हमला करने की योजना बना रहा है. यह हमला पिछले जून के 12 दिवसीय युद्ध से भी कहीं बड़ा हो सकता है.
जून में हुए हवाई हमलों के दौरान ईरान ने लगभग 550 बैलिस्टिक मिसाइलें और 1000 से अधिक ड्रोन दागे थे, जिससे इजरायल को भारी नुकसान हुआ था.
रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान से दागी गई 10 प्रतिशत से अधिक मिसाइलें इजरायल की एयर डिफेंस प्रणाली को भेदने में सफल रहीं. एक हमले में 200 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं, जिसमें तीन लोगों की मौत और 60 से अधिक लोग घायल हुए थे.
विश्लेषकों का कहना है कि अब ईरान चीनी तकनीक की मदद से अपनी बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों को अपग्रेड कर रहा है, ताकि एक साथ दस गुना ज्यादा मिसाइलें लॉन्च की जा सकें.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में बार-बार शामिल होने से इनकार करने के बाद वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की आशंका फिर से गहराने लगी है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में हिंसक प्रदर्शनों के बावजूद ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोडक्शन लाइनें 24 घंटे काम कर रही हैं.
इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के विशेषज्ञ डॉ. रज जिम्ट ने कहा कि यदि युद्ध का अगला दौर शुरू होता है, तो इजरायल केवल सैन्य ठिकानों या परमाणु सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा.
डॉ. जिम्ट के मुताबिक, इजरायल भविष्य में तेल प्रतिष्ठानों और सीधे इस्लामिक शासन को निशाना बना सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान भी चुप नहीं बैठेगा और जवाबी मिसाइल हमले करेगा, जिससे संघर्ष अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों तक फैल सकता है.
विशेषज्ञों ने बताया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी सक्रिय है. देश के पास कम से कम 400 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है, जो 60 प्रतिशत तक समृद्ध किया जा चुका है. अगर इसे 90 प्रतिशत के सैन्य स्तर तक पहुंचाया जाए, तो इससे करीब 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं.
विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि इजरायल ने दोबारा हमला किया, तो तेहरान किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटेगा. First Updated : Saturday, 17 January 2026