ईरान इस वक्त आग में जल रहा है। सड़कों पर लोग शासन के खिलाफ उतर चुके हैं। सुरक्षा बलों की गोलियां चल रही हैं। इंटरनेट बंद किया जा रहा है। इस माहौल में रजा पहलवी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि अब दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए। उनका मानना है कि यह शासन आखिरी सांसें ले रहा है। यही वह पल है जब फैसला होना चाहिए।
पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से तुरंत कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने कहा कि खामेनेई की सरकार लोगों को कुचल रही है। उन्होंने इसे युद्ध जैसा हालात बताया। उनका कहना है कि ट्रंप की तय रेड लाइन पहले ही पार हो चुकी है। अब सिर्फ चेतावनी से काम नहीं चलेगा। दुनिया को दमन रोकने के लिए कदम उठाना होगा। वरना और खून बहेगा।
पहलवी का आरोप है कि ईरान बातचीत की आड़ में समय खरीद रहा है। उनका कहना है कि शासन प्रदर्शनों को दबाने के लिए यह चाल चल रहा है। तेहरान दुनिया को भ्रमित करना चाहता है। असल में वह हिंसा जारी रखना चाहता है। पहलवी ने कहा कि अब यह साफ हो चुका है। यह निर्णायक क्षण है। दुनिया को अब जवाब देना होगा।
उन्होंने खुद को ईरानियों की आवाज बताया है। उन्होंने कहा कि वे मंजिल नहीं बल्कि एक सेतु हैं। उनका दावा है कि प्रदर्शनकारियों में उनके नाम के नारे लग रहे हैं। यह उनके समर्थन का संकेत है। उन्होंने कहा कि वे निर्वासित ईरानियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी कोशिश है कि दुनिया उनकी पुकार सुने। वे सत्ता की कुर्सी नहीं बल्कि बदलाव चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि वे आज़ादी के लिए मरने को भी तैयार हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की बहादुरी का हवाला दिया।उनका कहना है कि जब लोग गोलियों के सामने खड़े हैं तो वे क्यों पीछे हटें। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक विरोध नहीं है। यह शासन के अंत की लड़ाई है। इसी को वह सच्ची क्रांति मानते हैं।उनका संदेश साफ है कि अब पीछे हटने का समय नहीं।
ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ईरानी नेताओं से बात की है। उन्होंने चेताया है कि अगर फिर लोगों की हत्या हुई तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विकल्प खुले हैं। हवाई हमले तक पर विचार हो रहा है।वाइट हाउस ने भी यही संकेत दिए हैं। यह बयान ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है। दुनिया अब वाशिंगटन की तरफ देख रही है।
ईरान की मुद्रा गिर चुकी है। लोग सड़कों पर हैं।सरकार घिरी हुई है। अब बाहरी दबाव भी बढ़ रहा है। रजा पहलवी इस पल को बदलाव का मौका मान रहे हैं। ट्रंप की अगली चाल बेहद अहम होगी। क्या अमेरिका दखल देगा या नहीं। ईरान का भविष्य इसी फैसले पर टिका है। First Updated : Tuesday, 13 January 2026