होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रखने की चेतावनी, ईरान के नए नेता के बयान से दुनिया भर में बढ़ी बेचैनी

मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहना चाहिए और अमेरिका-इज़रायल के खिलाफ बदला लिया जाएगा। इस बयान से वैश्विक तनाव और बढ़ गया है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की सबसे अहम समुद्री राह कहा जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला ज्यादातर तेल इसी रास्ते से दुनिया तक पहुंचता है। रोज हजारों जहाज इस संकरे रास्ते से गुजरते हैं। सऊदी अरब, कुवैत, इराक और यूएई का तेल भी इसी रास्ते से बाहर जाता है। दुनिया के कई बड़े देश इसी सप्लाई पर निर्भर हैं। चीन, जापान और भारत जैसे देश यहां से आने वाले तेल पर काफी भरोसा करते हैं। इसलिए अगर यह रास्ता बंद होता है तो पूरी दुनिया पर असर पड़ सकता है।

क्यों आया यह नया बयान

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका के सैन्य ठिकाने क्षेत्र में खुले रहे तो उन पर हमला हो सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह सीधा संदेश वॉशिंगटन और तेल अवीव को दिया गया है।

कौन कौन देश प्रभावित होंगे

अगर होर्मुज का रास्ता बंद होता है तो सबसे पहले असर तेल बाजार पर पड़ेगा। सऊदी अरब, कतर, कुवैत और इराक जैसे देशों का बड़ा निर्यात रुक सकता है। इन देशों की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तेल व्यापार पर टिका है। वहीं भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं। इन देशों को अचानक महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है। यूरोप के कई देश भी ऊर्जा संकट का सामना कर सकते हैं। इसलिए यह सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक चिंता बन सकता है।

क्या यह फैसला जल्दबाजी

कई विश्लेषक इस बयान को बेहद कड़ा मान रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी समुद्री राह को बंद करना आसान नहीं होता। इससे सिर्फ दुश्मन ही नहीं बल्कि कई दोस्त देश भी प्रभावित हो सकते हैं। कुछ लोग इसे दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं। जबकि कुछ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यह बयान भावनात्मक प्रतिक्रिया भी हो सकता है। क्योंकि युद्ध के माहौल में नेताओं के बयान अक्सर ज्यादा तीखे हो जाते हैं। इसलिए अभी यह साफ नहीं है कि यह चेतावनी है या वास्तविक योजना।

ट्रंप की नीति से बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व की यह आग अचानक नहीं भड़की है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की आक्रामक नीति ने हालात और जटिल कर दिए। मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सैन्य दबाव और प्रतिबंध लगातार बढ़ाए गए हैं। इससे क्षेत्र में टकराव और गहरा हो गया है। अब ईरान भी खुलकर जवाब देने की भाषा बोल रहा है। यही वजह है कि हालात हर दिन और तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।

दुनिया की सांस क्यों अटकी

होर्मुज जलडमरूमध्य को कई लोग दुनिया की ऊर्जा नस कहते हैं। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह नस रुक गई तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। तेल की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं। पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है। इसलिए दुनिया के बड़े देश इस बयान को बहुत गंभीरता से देख रहे हैं।

अब सबकी नजर आने वाले दिनों पर टिकी है। क्या ईरान सच में इस रास्ते को बंद करने की कोशिश करेगा। या यह सिर्फ रणनीतिक दबाव बनाने का तरीका है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी चुप नहीं बैठेंगे। अगर टकराव बढ़ा तो समुद्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो सकती हैं। फिलहाल दुनिया इंतजार कर रही है कि कूटनीति रास्ता निकाले। क्योंकि अगर यह समुद्री रास्ता बंद हुआ तो इसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।

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