ईरान ने होर्मुज को लेकर फिर धमकाया, कहा- 'हथियार उठाने के लिए तैयार हैं'
ईरान ने अमेरिका की नाकेबंदी के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकने का अपना रुख और सख्त कर दिया है. इस बढ़ते तनाव के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालात और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है.

ईरान ने एक बार फिर साफ संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकने की अपनी नीति पर कायम रहेगा. तेहरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखेगा, तब तक वह भी इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर दबाव बनाए रखेगा. इस स्थिति ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी गहराने लगी है.
बातचीत की राह मुश्किल
इस घटनाक्रम के बीच मध्यस्थ देश, खासकर पाकिस्तान की अगुवाई में युद्धविराम को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं. हालांकि, दोनों पक्षों की सख्त स्थिति के कारण बातचीत की राह मुश्किल होती जा रही है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या तय समय सीमा के बाद भी युद्धविराम जारी रह पाएगा या नहीं.
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं मिलती तो अन्य देशों के जहाजों को भी वहां से गुजरने की छूट नहीं दी जाएगी. उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को रोकता रहेगा. उनका यह बयान ऐसे समय आया जब हाल ही में ईरानी नौसेना ने इस क्षेत्र से गुजरने की कोशिश कर रहे कुछ जहाजों पर चेतावनी स्वरूप गोलीबारी की थी.
गौरतलब है कि ईरान ने कुछ समय पहले ही इस जलडमरूमध्य को खोलने की घोषणा की थी. यह कदम इजरायल और लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद उठाया गया था. लेकिन हालात जल्द ही फिर बदल गए, जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकेबंदी जारी रखने का ऐलान कर दिया.
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तब तक यह प्रतिबंध जारी रहेंगे. इसके जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए होर्मुज में अपनी पाबंदियां जारी रखने की बात कही.
इस बीच ईरान की संसद के उपाध्यक्ष हामिदरेजा हाजी बाबाई ने भी सख्त बयान देते हुए कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सांसद भी हथियार उठाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने दावा किया कि सांसदों ने एक विशेष लड़ाकू इकाई का गठन किया है और जरूरत पड़ने पर वे अमेरिका का सीधे मुकाबला करने से पीछे नहीं हटेंगे.
कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व में अस्थिरता को बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है.


