नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया के मुसलमानों की चिंता बढ़ा दी है. खासकर रमजान के महीने में उमराह करने गए लाखों तीर्थयात्रियों की यात्रा ठप हो गई है. सऊदी अरब में फंसे लोग घर लौटने के लिए परेशान हैं, जबकि कईयों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी है. यह संकट सिर्फ यात्रा का नहीं, बल्कि आस्था और सुरक्षा का भी है.
इंडोनेशिया, दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. उप मंत्री दहनिल अंजर सिमनजंतक के अनुसार, 58,860 से ज्यादा इंडोनेशियाई तीर्थयात्री सऊदी अरब में फंसे हैं. सरकार सऊदी अधिकारियों और एयरलाइंस से बात कर रही है ताकि अतिरिक्त होटल और उड़ान खर्च कम हो सके. लगभग 60,000 लोगों से अप्रैल तक उमराह टालने की अपील की गई है.
एक फंसी हुई तीर्थयात्री जनिराह फारिस ने बताया कि उनकी उड़ान रद्द हो गई और अब 12 मार्च की फ्लाइट मिली है. वे कहती हैं, "हर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं उठा सकता, बच्चे इंतजार कर रहे हैं."
मलेशिया में भी करीब 1,600 उमराह यात्री फंसे हैं. जेद्दा में मलेशियाई महावाणिज्य दूत मोहम्मद दजराफ रजा अब्दुल कादिर ने कहा कि सभी सुरक्षित हैं. 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष खोला गया है. मलेशिया एयरलाइंस ने जेद्दा और मदीना से अस्थायी वापसी उड़ानें शुरू की हैं. सरकार कूटनीतिक मिशनों के साथ मिलकर निकासी की कोशिश कर रही है.
यह संकट हर देश के यात्रियों को अलग-अलग तरीके से परेशान कर रहा है. मिस्र के 44 वर्षीय माजेद खोलैफ ने फ्लाइट रद्द होने पर सड़क मार्ग से कुवैत लौटकर परिवार से मिला. अमेरिका के जावेद खिज्र ने सुरक्षा के डर से पूरी यात्रा रद्द कर दी.
वहीं, सऊदी में मौजूद माजिद मुगल कहते हैं, "अगर युद्ध का पता होता तो नहीं आते. अब फ्लाइट स्टेटस चेक करते रहते हैं, बच्चे स्कूल जाने को तैयार हैं."
उमराह साल भर हो सकता है, लेकिन रमजान में लाखों मुसलमान इसे करते हैं. खाड़ी के हवाई अड्डे एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ते हैं, इसलिए युद्ध से उड़ानें रद्द होने पर पूरी दुनिया प्रभावित हुई है. कई देशों के तीर्थयात्री फंसे हैं, खर्च बढ़ रहा है और आस्था पर संकट मंडरा रहा है. First Updated : Saturday, 07 March 2026