‘भारत निभाए बड़ी भूमिका’, ईरान के विदेश मंत्री का नई दिल्ली से संदेश

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत से क्षेत्रीय शांति स्थापित करने में अधिक सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: अब्बास अराघची ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत से क्षेत्रीय शांति स्थापित करने में अधिक सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की है. नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि भारत एक जिम्मेदार और प्रभावशाली देश है, जो मौजूदा संकट को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान से जुड़े मुद्दों और पूरे पश्चिम एशियाई संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है, किसी सैन्य कार्रवाई से नहीं.

अराघची ने क्या कहा? 

ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने भारत पहुंचे अराघची ने कहा कि ईरान क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम रखने के लिए हर उस पहल का समर्थन करेगा, जिसमें भारत रचनात्मक भूमिका निभाए. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली के पास वैश्विक मंच पर प्रभाव और संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण है, जिसका उपयोग मौजूदा हालात को संभालने में किया जा सकता है. ईरानी मंत्री ने कहा कि भारत द्वारा उठाया गया कोई भी सार्थक कदम पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मददगार साबित हो सकता है.

उन्होंने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया और वहां की स्थिति को जटिल बताया. अराघची ने कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है और ईरान वहां जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है. उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात सामान्य होने के बाद इस मार्ग पर यातायात फिर सुचारु रूप से शुरू हो सकेगा.

अमेरिका के साथ संबंधों पर क्या बोले ईरानी विदेश मंत्री? 

अमेरिका के साथ संबंधों पर बोलते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास की स्थिति बनी हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे संघर्ष और तनाव के बाद अमेरिका ने बातचीत का प्रस्ताव तो दिया, लेकिन ईरान को अब भी वॉशिंगटन की नीयत पर भरोसा नहीं है. अराघची ने कहा कि यही अविश्वास किसी भी कूटनीतिक प्रयास की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है.

उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिशों का भी जिक्र किया और कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह विफल नहीं हुई है, लेकिन विश्वास की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही. साथ ही उन्होंने चीन की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि चीन पहले भी ईरान और सऊदी अरब के बीच रिश्ते बहाल कराने में मदद कर चुका है. ईरान को उम्मीद है कि चीन की पहल से भविष्य में बेहतर परिणाम निकल सकते हैं.

परमाणु कार्यक्रम को लेकर अराघची ने दोहराया कि ईरान ने कभी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं की. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का व्यावहारिक समाधान केवल बातचीत और शांतिपूर्ण कूटनीति के जरिए ही निकाला जा सकता है.

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