ड्रोन सिटी, सुपर फाइटर जेट और स्मार्ट हथियारों से भारत ने छेड़ी रक्षा क्रांति की निर्णायक लड़ाई

भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। आंध्र प्रदेश में कई बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट्स की शुरुआत हुई है, जिनके जरिए अब भारत अपने लड़ाकू विमान, ड्रोन, टॉरपीडो और आधुनिक हथियार खुद तैयार करेगा। इससे विदेशी निर्भरता घटेगी और देश की सैन्य ताकत कई गुना मजबूत होगी।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

भारत अब रक्षा क्षेत्र में सिर्फ खरीददार नहीं, बल्कि दुनिया को तकनीक देने वाली ताकत बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। देश में पहली बार ड्रोन सिटी, फिफ्थ जेनरेशन सुपर फाइटर जेट और स्मार्ट हथियारों जैसे हाईटेक प्रोजेक्ट्स पर एक साथ काम शुरू हुआ है। इन परियोजनाओं का मकसद भारत को युद्ध तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना और विदेशी निर्भरता खत्म करना है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में यही तकनीक भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। डिफेंस सेक्टर में शुरू हुई यह नई क्रांति भारत को वैश्विक सैन्य टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

रक्षा क्षेत्र में भारत का बड़ा दांव

भारत अब रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आंध्र प्रदेश में रक्षा मंत्री Rajnath Singh और मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu की मौजूदगी में कई बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट्स की नींव रखी गई। इन परियोजनाओं का मकसद भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में दुनिया की बड़ी ताकतों की कतार में खड़ा करना है। अब देश में ही आधुनिक लड़ाकू विमान, अंडरवॉटर सिस्टम, ड्रोन और हाईटेक हथियार बनाए जाएंगे।

भारत बनाएगा अपना फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट

इस मौके पर भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान “AMCA” के लिए कोर इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर की नींव रखी गई। यह प्रोजेक्ट Aeronautical Development Agency द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो Defence Research and Development Organisation के साथ मिलकर काम कर रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह पूरी तरह स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर जेट होगा, जो दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों के पास ही मौजूद है। इससे पहले यही एजेंसी देश को तेजस मार्क-1 दे चुकी है और अब तेजस मार्क-2 पर भी काम चल रहा है।

समुद्र में भी बढ़ेगी भारत की ताकत

भारतीय नौसेना के लिए भी एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। Bharat Dynamics Limited की ओर से 480 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक अंडरवॉटर सिस्टम सेंटर बनाया जा रहा है। यहां ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल, अंडरवॉटर काउंटर मेजर सिस्टम और अगली पीढ़ी के टॉरपीडो तैयार किए जाएंगे। अब तक इन तकनीकों और उपकरणों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब यह सब देश में ही बनेगा। इससे भारतीय नौसेना की ताकत और समुद्री सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।

भविष्य की जंग के लिए तैयार होंगे नए हथियार

एक और बड़ा प्रोजेक्ट Agneyastra Energetics द्वारा शुरू किया गया है। यह कंपनी 1500 करोड़ रुपये के निवेश से अत्याधुनिक हथियार निर्माण सुविधा तैयार कर रही है। यहां ऐसे हथियार बनाए जाएंगे जो भविष्य की लड़ाइयों में भारतीय सेना को नई ताकत देंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ बंदूकों से नहीं, बल्कि तकनीक से लड़े जाएंगे और भारत उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

गोला-बारूद और फ्यूज सिस्टम में आत्मनिर्भरता

HFCL की ओर से 1294 करोड़ रुपये की लागत से एम्युनिशन और इलेक्ट्रिक फ्यूज प्लांट बनाया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी गोला-बारूद का सबसे अहम हिस्सा उसका फ्यूज होता है। अगर फ्यूज भरोसेमंद न हो तो पूरा हथियार बेकार हो सकता है। अब भारत में ही अत्याधुनिक फ्यूज बनने से तीनों सेनाओं की ताकत बढ़ेगी और विदेशी निर्भरता कम होगी।

कुरनूल बनेगा भारत का “ड्रोन सिटी”

आंध्र प्रदेश के कुरनूल में आठ ड्रोन कंपनियां मिलकर “ड्रोन सिटी” तैयार कर रही हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि ड्रोन तकनीक आज के युद्ध में गेम चेंजर बन चुकी है। अब कृषि, सुरक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में भी ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में कुरनूल पूरी दुनिया में ड्रोन हब के रूप में पहचाना जाएगा। जिस तरह बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है, उसी तरह कुरनूल को भारत की ड्रोन सिटी कहा जाएगा।

रोजगार और शिक्षा क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा

इन सभी प्रोजेक्ट्स का असर सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इंजीनियरिंग कॉलेज, आईटीआई और तकनीकी संस्थानों को भी इन परियोजनाओं से जोड़ा जाएगा। इससे देश में नई तकनीक का विकास होगा और युवाओं को आधुनिक रक्षा तकनीकों पर काम करने का मौका मिलेगा।

विदेशी निर्भरता खत्म करने की बड़ी तैयारी

भारत लंबे समय से कई रक्षा उपकरणों और तकनीकों के लिए विदेशों पर निर्भर रहा है। लेकिन अब सरकार का फोकस “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” पर है। इन परियोजनाओं के जरिए भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि भविष्य में रक्षा उपकरणों का बड़ा निर्यातक भी बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में नई पहचान दिला सकता है।

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