ईरान को रोकना जरूरी था, वरना भारत के हित भी पड़ते खतरे में: इजरायली राजदूत

इजरायल के राजदूत आजार ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई केवल इजरायल की सुरक्षा नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार की रक्षा के लिए जरूरी थी. उनका दावा है कि अगर अभी कदम नहीं उठाया जाता तो ईरान भविष्य में बड़ा हमला कर सकता था, जिससे भारत समेत कई देशों के हित प्रभावित हो सकते थे.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि यह कदम केवल इजरायल की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र और वैश्विक व्यापार की स्थिरता के लिए भी जरूरी था. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो आने वाले वर्षों में ईरान की गतिविधियां कई देशों के लिए गंभीर खतरा बन सकती थीं, जिनमें भारत भी शामिल है.

अजार ने क्या दावा किया?

मीडिया से बातचीत में अजार ने दावा किया कि ईरान वर्ष 2027 तक इजरायल पर बड़े स्तर का हमला करने की योजना बना रहा था. उनके अनुसार, तेहरान की रणनीति खाड़ी और अरब देशों के मौजूदा ढांचे को अस्थिर कर क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की थी. यदि ऐसा होता, तो खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा के साथ-साथ भारत और इन देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंधों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता था.

अजार ने यह भी कहा कि स्थिति और गंभीर हो सकती थी यदि ईरान के पास परमाणु हथियारों का बड़ा भंडार होता. उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पहले भी अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ आक्रामक कदम उठाए हैं. इसलिए समय रहते कार्रवाई करना जरूरी था. उनके मुताबिक अमेरिका और इजरायल द्वारा उठाया गया कदम केवल दोनों देशों के हितों के लिए नहीं बल्कि उन सभी देशों के लिए अहम है जिनका व्यापार और रणनीतिक हित पश्चिम एशिया से जुड़े हुए हैं.

राजदूत ने यह भी कहा कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीयों के लिए भी यह स्थिति राहत भरी हो सकती है, क्योंकि लंबे समय से ईरान से उत्पन्न खतरे को लेकर चिंता बनी हुई थी. उन्होंने बताया कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद कूटनीति के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और अमेरिका सहित कई देशों के साथ बातचीत जारी है.

इस्लामी क्रांति से पहले ईरान और इजरायल के संबंध 

अजार के अनुसार, यदि ईरान अपना रुख बदलता है और इजरायल के अस्तित्व को स्वीकार करता है तो भविष्य में क्षेत्र में स्थिरता और शांति की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस्लामी क्रांति से पहले ईरान और इजरायल के बीच संबंध अपेक्षाकृत बेहतर थे, लेकिन ईरानी क्रांति के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए.

राजदूत ने इजरायल और अमेरिका के बीच किसी भी तरह के मतभेद की बात को खारिज करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच पूरी तरह तालमेल है. उन्होंने बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के बीच लगातार बातचीत हो रही है. दोनों देशों का लक्ष्य या तो ईरान को अंतरराष्ट्रीय शर्तें मानने के लिए राजी करना है या फिर उसकी सैन्य क्षमता को इतना कमजोर कर देना है कि वह क्षेत्र में किसी को नुकसान न पहुंचा सके.

मौजूदा संघर्ष को लेकर अजार की उम्मीद

अजार ने यह भी उम्मीद जताई कि मौजूदा संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. उन्होंने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी आशंकाओं को कम बताते हुए कहा कि यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. उनके मुताबिक कुछ आर्थिक असर जरूर पड़ सकता है, लेकिन स्थिति उतनी गंभीर नहीं है जितनी आशंका जताई जा रही है.

अंत में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ईरान की सैन्य गतिविधियों की तीव्रता कम होती दिखाई दे रही है, जिससे संकेत मिलता है कि उसके हथियारों का भंडार सीमित हो रहा है और हालात जल्द सामान्य हो सकते हैं.

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