स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर बड़ा अपडेट: हालात तो सुधरे, लेकिन ट्रैफिक अब भी धीमा!

समुद्री ट्रैकिंग डेटा बताता है कि बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 34 कॉमर्शियल जहाज गुजरे। यह आंकड़ा पहले से बेहतर जरूर है, लेकिन युद्ध से पहले यहां रोजाना औसतन 100 जहाज आते-जाते थे।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने के बाद पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हैं। इसी समुद्री रास्ते से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और एलएनजी गुजरता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यहां हालात पूरी तरह सामान्य हो गए हैं?  

अभी भी युद्ध से पहले जैसी रफ्तार नहीं   

समुद्री ट्रैकिंग डेटा बताता है कि बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 34 कॉमर्शियल जहाज गुजरे। यह आंकड़ा पहले से बेहतर जरूर है, लेकिन युद्ध से पहले यहां रोजाना औसतन 100 जहाज आते-जाते थे। यानी ट्रैफिक लौट रहा है, पर पूरी रफ्तार अभी नहीं पकड़ पाया।  

युद्ध के दौरान हालात बहुत खराब थे। 1 मार्च से 17 जून के बीच तनाव बढ़ने से रोजाना सिर्फ 13 जहाज ही गुजर रहे थे। कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा के चलते रूट बदल दिए थे, तो कुछ ने सेवाएं ही रोक दी थीं।  

ट्रैफिक सामान्य क्यों नहीं हो पा रहा?   

17 जून को हुए समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोलने पर सहमति बनी थी। कॉमर्शियल जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू करने की बात कही गई। इसके बाद जहाज लौटे भी हैं, लेकिन शिपिंग कंपनियां अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।  

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा की है। जॉइंट मैरिटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर ने साफ किया है कि यहां कई समुद्री खतरे हैं। कुछ इलाकों में बारूदी सुरंगें अब भी हैं और उन्हें हटाने का काम चल रहा है। ऐसे में जहाजों को ज्यादा सतर्क रहना पड़ रहा है।  

संकरी जगह, बड़ा खतरा   

होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। सबसे संकरे हिस्से में यह सिर्फ 24 मील चौड़ा है। एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ ओमान है। इतनी कम जगह होने से जहाजों के पास खतरे से बचने का विकल्प कम रहता है। यही वजह है कि कोई भी सैन्य तनाव सबसे पहले इसी रास्ते को प्रभावित करता है।  

पाबंदी हटते ही ईरान ने बढ़ाया तेल निर्यात   

समझौते के तहत अमेरिका को 19 जुलाई तक ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक नाकेबंदी हटानी है। ईरान ने भी युद्ध से पहले के स्तर तक जहाजों की आवाजाही पहुंचाने का वादा किया है। पाबंदी हटने के बाद ईरान करीब 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेच चुका है। हालांकि खाड़ी के बाकी देशों को अभी भी सामान्य निर्यात में दिक्कत हो रही है।  

किसका रहेगा नियंत्रण, बड़ा सवाल बरकरार  

सबसे अहम सवाल अब भी बाकी है कि होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण किसका होगा। मौजूदा समझौते में इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। फिलहाल 60 दिन तक जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन बाद में ईरान शुल्क लगाने की योजना बना सकता है। इसलिए युद्ध रुकने के बावजूद यह रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य नहीं माना जा रहा।  

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