‘नो वैक्सीन, नो इलाज’… अफ्रीका में फैली इबोला संक्रमण ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन, ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है. चिंता की बात यह है कि यह संक्रमण इबोला के खतरनाक बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से फैल रहा है, जिसके लिए फिलहाल न तो कोई प्रभावी वैक्सीन मौजूद है और न ही पक्का इलाज.

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता की वैश्विक स्वास्थ्य आपातस्थिति घोषित कर दिया है. यह WHO की ओर से जारी किया जाने वाला सबसे बड़ा स्वास्थ्य अलर्ट माना जाता है. संक्रमण के मामलों के सीमाएं पार कर बड़े शहरों तक पहुंचने के बाद यह फैसला लिया गया है.
स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, इबोला के पुष्ट मामले अब युगांडा की राजधानी कंपाला और कांगो की राजधानी किंशासा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में सामने आ चुके हैं. हालांकि WHO ने साफ किया है कि मौजूदा स्थिति गंभीर जरूर है, लेकिन फिलहाल इसे महामारी घोषित करने के मानदंड पूरे नहीं हुए हैं.
बुंडिबुग्यो स्ट्रेन बना बड़ी चिंता
यह प्रकोप इबोला वायरस के दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है. WHO के मुताबिक इस स्ट्रेन के खिलाफ अभी तक कोई प्रभावी टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है.आमतौर पर फैलने वाले इबोला-जायरे स्ट्रेन के लिए जहां प्रमाणित वैक्सीन और थेरेपी मौजूद हैं, वहीं बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ चिकित्सा विकल्पों की कमी ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
कांगो में तेजी से बढ़ रहे संदिग्ध मामले
16 मई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कांगो के पूर्वोत्तर इटुरी प्रांत में इबोला के 246 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें प्रयोगशाला जांच में 8 संक्रमणों की पुष्टि हुई है, जबकि 80 संदिग्ध मौतों की रिपोर्ट सामने आई है. प्रभावित इलाकों में बूनिया, र्वाम्परा और मोंगब्वालु स्वास्थ्य क्षेत्र शामिल हैं. WHO ने चेतावनी दी है कि वास्तविक संक्रमण आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं, क्योंकि जांच किए गए नमूनों में पॉजिटिविटी दर काफी ज्यादा है और संदिग्ध मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
कहां तक पहुंचा संक्रमण?
WHO ने अपने बयान में कहा, डीआरसी-युगांडा में फैला यह प्रकोप अन्य देशों के लिए भी सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा जोखिम बन गया है, और इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने के कुछ मामले पहले ही देखें जा चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक कांगो से यात्रा कर युगांडा की राजधानी कंपाला पहुंचे दो अलग-अलग यात्रियों में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है. इसके अलावा, इटुरी प्रांत से कांगो की राजधानी किंशासा लौटे एक व्यक्ति में भी वायरस पाया गया है. इससे स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि संक्रमण अब दूरदराज के क्षेत्रों से निकलकर बड़े महानगरों तक पहुंच चुका है.
सीमाओं पर बढ़ाई गई निगरानी
WHO ने कांगो की सीमा से जुड़े सभी पड़ोसी देशों से तत्काल आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र सक्रिय करने की अपील की है. साथ ही सीमा चौकियों और आंतरिक परिवहन मार्गों पर स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. एजेंसी ने सलाह दी है कि इबोला के पुष्ट मरीज और हाई रिस्क संपर्क 21 दिन पूरे होने तक अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचें.
सीमा बंद न करने की सलाह
WHO ने सरकारों को यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि सीमाओं को पूरी तरह बंद करने या व्यापार पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम न उठाए जाएं. एजेंसी के अनुसार, अत्यधिक सख्त प्रतिबंधों की स्थिति में लोग अनौपचारिक और अवैध रास्तों से सीमा पार करने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे संक्रमण की निगरानी करना और मुश्किल हो जाएगा.


