पाकिस्तान की सियासत में हलचल: बिलावल भुट्टो ने इमरान की पार्टी से गठबंधन का दिया संकेत

गिलगित बाल्टिस्तान विधानसभा में कुल 24 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 13 विधायकों का समर्थन जरूरी है। इस बार बिलावल की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसे 10 सीटें मिली हैं।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ अब अंदर ही अंदर बड़ा खेल शुरू हो गया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने जेल में बंद इमरान खान की पार्टी पीटीआई से हाथ मिलाने की तैयारी कर ली है। इस गठबंधन की शुरुआत गिलगित बाल्टिस्तान से हो सकती है, जहां हाल ही में विधानसभा चुनाव हुए हैं।  

गिलगित में सरकार बनाने की कवायद   

जियो न्यूज उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, गिलगित बाल्टिस्तान विधानसभा में कुल 24 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 13 विधायकों का समर्थन जरूरी है। इस बार बिलावल की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसे 10 सीटें मिली हैं।

शहबाज शरीफ की पार्टी के पास 5 विधायक हैं, जबकि इमरान खान की पीटीआई के पास 2 सीटें हैं। बिलावल ने सरकार बनाने के लिए पीटीआई से संपर्क साधा है। अगर इमरान की पार्टी हरी झंडी दे देती है तो शहबाज सरकार के लिए ये बड़ा झटका साबित हो सकता है।  

2022 का बदला ले रहे बिलावल?   

2022 में इमरान खान को सत्ता से हटाने में बिलावल भुट्टो की पार्टी ने शहबाज शरीफ का साथ दिया था। इसके बाद 2024 के चुनाव में शहबाज प्रधानमंत्री बने। बिलावल की पार्टी को बलूचिस्तान और सिंध में सरकार बनाने का मौका मिला, जबकि पंजाब में शहबाज की पार्टी की सरकार बनी। खैबर पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी ने सत्ता हासिल की।  

लेकिन अब बिलावल शहबाज सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं। हालिया केंद्रीय बजट के दौरान उन्होंने खुलकर विरोध किया था। राज्यपालों की नियुक्ति को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं।  

बिलावल की सियासी ताकत  

नेशनल असेंबली में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के पास 74 सीटें हैं। कुल 332 सीटों वाली असेंबली में सरकार बनाने के लिए 167 का आंकड़ा चाहिए। शहबाज शरीफ की पार्टी के पास फिलहाल 131 सीटें हैं, जो बहुमत से काफी दूर है।  

पी सिंध, इस्लामाबाद, बलूचिस्तान, गिलगित और पीओके में मजबूत स्थिति में है। अगर बिलावल और इमरान के बीच गठबंधन हो जाता है तो पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है। दोनों पार्टियों के साथ आने से शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ेगा और सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।  

फिलहाल पीटीआई की तरफ से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन अगर दोनों पार्टियां साथ आती हैं तो ये शहबाज शरीफ के लिए 2022 जैसी ही सियासी चुनौती बन सकती है।  

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