पाकिस्तान की दोहरी कूटनीति? अमेरिका-ईरान वार्ता की पहल के बीच सऊदी-तुर्किये दौरे पर शहबाज शरीफ
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में सक्रिय नजर आ रहा है. एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो वहीं प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब और तुर्किये दौरे पर जा रहे हैं, जिससे कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है.

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं और इस सप्ताह सऊदी अरब व तुर्किये के दौरे पर जाने वाले हैं. उनका उद्देश्य मध्यस्थ देशों के साथ चर्चा कर अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत को आगे बढ़ाना है.
पाकिस्तान की इस पहल को कूटनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी इस प्रयास की पुष्टि करते हुए कहा है कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संवाद बनाए रखना जरूरी है.
शहबाज शरीफ की कूटनीतिक सक्रियता
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने मंगलवार को जारी बयान में बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें इस पहल की जानकारी दी है. उन्होंने शरीफ और अन्य अधिकारियों से अपील की है कि वे अमेरिका, ईरान और अन्य अहम देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें, ताकि वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके.
21 घंटे की बातचीत रही बेनतीजा
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक चली बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी. इस्लामाबाद में हुई इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ शामिल हुए थे, लेकिन सहमति नहीं बन पाई.
फिर शुरू हो सकती है वार्ता
हालांकि अब एक बार फिर बातचीत शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दो दिनों में वार्ता फिर से शुरू हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि इस बार बातचीत पाकिस्तान में होने की संभावना ज्यादा है और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया.
बातचीत के लिए तैयार दोनों पक्ष
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान दोनों ही नए दौर की बातचीत के लिए तैयार हैं. हालांकि, इसकी तारीख, स्थान और प्रतिनिधिमंडल की संरचना अभी तय नहीं हुई है. इस्लामाबाद और जिनेवा को संभावित मेजबान शहरों के रूप में देखा जा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र की भी उम्मीदें
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी उम्मीद जताई है कि युद्धविराम वार्ता फिर से शुरू हो सकती है. उन्होंने कहा कि इतने जटिल विवाद का समाधान एक बैठक में संभव नहीं है, इसलिए निरंतर बातचीत और युद्धविराम बनाए रखना आवश्यक है.
दो सप्ताह का युद्धविराम लागू
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू है, जिससे स्थिति कुछ हद तक शांत हुई है. हालांकि इस दौरान अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी की है, जबकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण सख्त कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में उछाल देखा गया है.
आगे क्या? सबकी नजर पाकिस्तान पर
मौजूदा हालात में सबसे अहम बात यह है कि संवाद के रास्ते खुले हुए हैं और युद्धविराम कायम है. यही वजह है कि मध्यस्थ देशों को उम्मीद है कि दोनों पक्ष जल्द ही फिर से बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह वार्ता दोबारा शुरू होती है, तो यह न केवल क्षेत्रीय तनाव को कम करेगी, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि क्या पाकिस्तान की यह पहल अमेरिका और ईरान के बीच जमी दूरी को खत्म कर पाएगी.


