नई दिल्ली: पाकिस्तान ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान को अपना पांचवां प्रांत बनाने की दिशा में शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया। इलाके की विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन कर इसे पूर्ण प्रांतीय दर्जा देने की मांग की। अगर संसद इसे मंजूरी देती है तो पाकिस्तान के प्रशासनिक नक्शे में बड़ा बदलाव होगा और जम्मू-कश्मीर विवाद में एक नया पहलू जुड़ जाएगा।
प्रस्ताव में कहा गया कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के नागरिकों जैसे सभी संवैधानिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकार मिलने चाहिए। इसमें नेशनल असेंबली, सीनेट और अन्य संघीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की मांग भी शामिल है।
साथ ही ये भी जोड़ा गया कि ये दर्जा "अस्थायी" होगा और ये जम्मू-कश्मीर विवाद के भविष्य के किसी भी समाधान पर निर्भर रहेगा। यानी पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए दरवाजा खुला रखा है। प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विपक्ष के नेता और निर्दलीय सदस्यों ने दस्तखत किए। अब इसे आगे की कार्रवाई के लिए इस्लामाबाद भेजा गया है।
ये कदम ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान खुद कई घरेलू संकटों से जूझ रहा है। बलूचिस्तान में सुरक्षा हालात खराब हैं और खैबर पख्तूनख्वा में चरमपंथी हमले बढ़े हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए लंबे समय से लंबित इस प्रस्ताव को फिर हवा दे रही है। फिलहाल गिलगित-बाल्टिस्तान का शासन सीमित स्व-शासन के तहत चलता है। इसे चार प्रांतों जैसा संवैधानिक दर्जा नहीं मिला है।
ये घटनाक्रम 7 जून के विधानसभा चुनाव के कुछ हफ्ते बाद हुआ है। चुनाव में धांधली के आरोप लगे थे। बिलावल भुट्टो की PPP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और अमजद हुसैन मुख्यमंत्री बने।
किसी को बहुमत नहीं मिलने पर PPP और शहबाज शरीफ की PML-N ने गठबंधन सरकार बनाई। समझौते के तहत PPP को CM और स्पीकर का पद मिला, जबकि PML-N को गवर्नर और डिप्टी स्पीकर मिले। सत्ता संभालते ही नई सरकार ने प्रांत का दर्जा वाला प्रस्ताव पास कर दिया।
ये विचार नया नहीं है। अगस्त 2019 में भारत द्वारा अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के बाद इमरान खान सरकार ने भी ऐसा प्रस्ताव लाया था, लेकिन वो आगे नहीं बढ़ा। मौजूदा सरकार का तर्क है कि इलाके को औपचारिक रूप से संवैधानिक ढांचे में लाना जरूरी है।
भारत पहले भी साफ कर चुका है कि गिलगित-बाल्टिस्तान समेत पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। नई दिल्ली ने कहा है कि पाकिस्तान द्वारा अपने कब्जे वाले इलाकों का दर्जा बदलने के एकतरफा कदमों की कोई कानूनी वैधता नहीं है। First Updated : Friday, 17 July 2026