नेपाल की सियासत में बड़ा भूचाल! 2 मंत्रियों के इस्तीफे के बाद PM बालेन शाह की कुर्सी डगमगाई
सबसे बड़ा झटका गृहमंत्री सुदान गुरुंग के इस्तीफे से लगा। एक विवादित कारोबारी से कथित संबंधों और शेयर लेन-देन के आरोपों के बीच उन्होंने पद छोड़ दिया। गुरुंग को मंत्री बने एक महीना भी पूरा नहीं हुआ था।

नई दिल्ली: नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार बनने के महज एक महीने बाद ही संकट में घिर गई है। कैबिनेट से दो मंत्रियों के इस्तीफे और संसद सत्र निलंबित होने से सियासी पारा चढ़ गया है। विशेषज्ञ इसे बालेन शाह के लिए असली परीक्षा मान रहे हैं। अगर उनकी सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाई तो नेपाल में नया इतिहास बनेगा।
जब नेपाल के गृहमंत्री ने भी दिया इस्तीफा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सबसे बड़ा झटका गृहमंत्री सुदान गुरुंग के इस्तीफे से लगा। एक विवादित कारोबारी से कथित संबंधों और शेयर लेन-देन के आरोपों के बीच उन्होंने पद छोड़ दिया। गुरुंग को मंत्री बने एक महीना भी पूरा नहीं हुआ था। इस्तीफे के बाद गृह मंत्रालय अब सीधे पीएम बालेन शाह के पास है।
गुरुंग ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मेरे लिए पद से बड़ी नैतिकता है। जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत है।” उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए इस्तीफा जरूरी था। गौरतलब है कि गृहमंत्री बनते ही गुरुंग ने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को Gen-Z प्रदर्शनों में हुई मौतों के मामले में गिरफ्तार करवाया था। तब उन्होंने कहा था, “कानून से ऊपर कोई नहीं।”
अचानक स्थगित हुआ संसद सत्र
गुरुंग के इस्तीफे के ठीक अगले दिन राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सरकार की सिफारिश पर संसद के दोनों सदनों का सत्र निलंबित कर दिया। यह सत्र 30 अप्रैल से शुरू होना था। राष्ट्रपति कार्यालय ने "विशेष कारणों" का हवाला दिया, लेकिन सियासी गलियारों में इसे सरकार पर बढ़ते दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
9 अप्रैल 2026 को श्रम मंत्री दीप कुमार शाह को भी पद से हटाया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पत्नी को नेपाल स्वास्थ्य बीमा बोर्ड का सदस्य बनवाने के लिए पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्हें हटाने की सिफारिश राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी प्रमुख रवि लामिछाने ने की थी।
लोकतंत्र की राह मुश्किल
राजशाही खत्म होने के बाद से नेपाल में लोकतंत्र लगातार लड़खड़ा रहा है। 2008 से अब तक 14 सरकारें बदल चुकी हैं, मगर एक भी पांच साल पूरा नहीं कर पाई। राजनीतिक अस्थिरता ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। विदेशी निवेश ठप है।
चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत भारी कर्ज दे रखा है। बाजार चीनी सामान से पटे हैं, जिनमें ज्यादातर अवैध तरीके से आते हैं। बालेन शाह के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है- जनता का भरोसा बनाए रखना। उसी भरोसे ने उन्हें सत्ता दी है। देखना होगा कि वह इस सियासी तूफान से कैसे निकलते हैं।


