PM मोदी के UAE दौरे से खुलेंगे निवेश के नए रास्ते, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में हुए कई अहम समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के UAE दौरे में रक्षा, ऊर्जा और निवेश से जुड़े कई बड़े समझौते हुए. होर्मुज स्ट्रेट और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी अहम चर्चा हुई. इसके साथ ही अबू धाबी पहुंचने पर पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया.

Shraddha Mishra

अबू धाबी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच देशों के महत्वपूर्ण विदेश दौरे की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कर दी है. वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है. शुक्रवार सुबह पीएम मोदी अबू धाबी पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी और पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया गया. UAE के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते हीF-16 लड़ाकू विमानों ने पीएम मोदी के विमान को एस्कॉर्ट किया. इसके साथ ही अबू धाबी पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.

इस दौरे को भारत और खाड़ी देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. UAE पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें रक्षा, ऊर्जा, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख रहे. इस दौरान पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत हर मुश्किल समय में UAE के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा. उन्होंने हाल ही में UAE में हुए हमले की कड़ी निंदा भी की.

पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है और इसे जल्द से जल्द सामान्य रूप से खोला जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत और UAE के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का गहरा संबंध है.

भारत-UAE के बीच हुए कई बड़े समझौते

इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत और UAE के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है.

रक्षा साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार: भारत और UAE ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और सैन्य समन्वय को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.

तेल भंडारण और LPG सप्लाई पर समझौता: ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने महत्वपूर्ण कदम उठाए. रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. इसके अलावा LPG सप्लाई को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को काफी मजबूती मिलेगी.

गुजरात में बनेगा शिप रिपेयर क्लस्टर: बैठक में गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर विकसित करने के लिए भी समझौता किया गया. यह परियोजना समुद्री व्यापार और जहाज मरम्मत क्षेत्र में भारत की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी.

5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा: UAE की ओर से भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में 5 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश करने की घोषणा भी की गई. इसे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा निवेश माना जा रहा है.

भारत-UAE रिश्ते क्यों हैं इतने खास?

UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. इसके अलावा पिछले 25 वर्षों में UAE भारत में निवेश करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है. सबसे खास बात यह है कि UAE में करीब 45 लाख भारतीय रहते और काम करते हैं. वहां से बड़ी मात्रा में भारत में पैसा भेजा जाता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसी वजह से UAE में स्थिरता और सुरक्षा का सीधा असर भारत और भारतीय परिवारों पर भी पड़ता है.

पांच देशों के दौरे पर हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी का यह विदेश दौरा 15 से 20 मई तक चलेगा. UAE के बाद वह नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, हरित विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना है. साथ ही यूरोप और खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक रिश्तों को और विस्तार देना भी इस दौरे का अहम हिस्सा माना जा रहा है.

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