नई दिल्लीः बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शुक्रवार को सरकारी कर्मचारियों ने नौवें राष्ट्रीय वेतनमान की मांग को लेकर मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के आधिकारिक निवास जमुना के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. यह घटना आम चुनाव से महज छह दिन पहले हुई, जब देश अगस्त 2024 की हिंसा के बाद पहली बार निर्वाचित सरकार की ओर बढ़ रहा है. उस समय छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़ने और भारत भागने पर मजबूर किया था. उसके बाद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जिसका मुख्य काम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है.
सुबह से ही देशभर से सरकारी कर्मचारी शहीद मीनार पर जमा हुए और जमुना की ओर मार्च निकाला. वे नौवें राष्ट्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर राजपत्र अधिसूचना जारी करने और तुरंत लागू करने की मांग कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, 'पेट में चावल नहीं तो मुंह में विकास कैसा?' वे सरकार पर आरोप लगा रहे थे कि वह उनकी आजीविका की चिंताओं को अनदेखा कर रही है. संगठन सरकारी कर्मचारी दाबी अदाई ओइक्य परिषद के बैनर तले यह आंदोलन चल रहा था.
सुबह करीब 11:30 बजे प्रदर्शनकारी शाहबाग में पुलिस की बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़े. पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वाटर कैनन, आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया. स्थिति बिगड़ने पर वर्दीधारी सैनिकों को भी तैनात किया गया. झड़पों में कई लोग घायल हो गए, कुछ रिपोर्टों में 15 से ज्यादा घायलों का जिक्र है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपायुक्त मसूद आलम ने एक प्रदर्शनकारी से सवाल किया कि क्या वे चुनाव में गड़बड़ी करने आए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया.
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो वे चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं. पुलिस ने कहा कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क हैं और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें कहीं और जाने के लिए मना रहे हैं. दोपहर तक शाहबाग और जमुना क्षेत्र तनावपूर्ण रहा, जहां भारी सुरक्षा बल तैनात थे. बाद में जमुना और आसपास के इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई.
आपको बता दें कि यह प्रदर्शन अंतरिम सरकार पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है. यूनुस प्रशासन सुधारों और चुनाव की तैयारी में जुटा है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों की यह मांग उनकी आर्थिक परेशानियों को उजागर करती है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर आज राजपत्र जारी नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा. स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और कोई भी बड़ा विवाद शांति भंग कर सकता है.
First Updated : Friday, 06 February 2026