Saudi Arabia's appeal: पाकिस्तान, लंबे समय से आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप झेलता रहा है. अब खुद उसी जाल में फंसता दिख रहा है. अफगान तालिबान के हालिया हमले ने शहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. तालिबान ने दावा किया है कि इस हमले में पाकिस्तान के 50 से अधिक सैनिक मारे गए और करीब दो दर्जन चौकियों पर कब्जा कर लिया गया. इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान को सऊदी अरब जैसी सहयोगी ताकतों से सैन्य मदद मिलेगी.
सऊदी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान-अफगान सीमा पर हुई हिंसा पर चिंता जताई है. मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों को संयम दिखाना चाहिए और तनाव को बातचीत से हल करने का प्रयास करना चाहिए. बयान में यह भी कहा गया कि क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए टकराव से बचना जरूरी है.
गौर करने वाली बात यह है कि कुछ हफ्ते पहले ही पाकिस्तान और सऊदी अरब ने रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. हालांकि यह साफ नहीं है कि सऊदी अरब किसी युद्ध की स्थिति में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करेगा या केवल रणनीतिक समर्थन देगा. दोनों देशों ने इस डील को आक्रामक नहीं बल्कि रक्षात्मक उद्देश्य से किया गया बताया था.
तालिबान के विदेश मंत्री मुत्तकी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने भीतर फैली उग्रवाद की समस्या से निपटना होगा. उन्होंने साफ किया कि अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का कोई सदस्य मौजूद नहीं है. साथ ही मुत्तकी ने यह भी जोड़ा कि सऊदी अरब और कतर ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार देर रात तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तान की कई चौकियों पर कब्जा कर लिया. जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना ने भी तालिबान की चौकियों पर हमला किया. खैबर-पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में जमकर गोलीबारी हुई, जिसमें अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, दीर और चित्राल प्रमुख हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक करीब 65 सैनिकों और लड़ाकों की मौत हो चुकी है. तालिबान की आक्रामक कार्रवाई ने पाकिस्तान को गहरे संकट में धकेल दिया है. First Updated : Sunday, 12 October 2025