SCO समिट में मोदी का पावर शो, पुतिन संग जुगलबंदी और शरीफ को सख्त इग्नोर कर दिया बड़ा संदेश

चीन के तियानजिन में हुए SCO समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज़ सबसे अलग दिखा। पुतिन संग गले लगना, शी चिनफिंग संग हाथ मिलाना और शरीफ को नजरअंदाज करना—इन सबने दुनिया को भारत का मज़बूत और साफ संदेश दिया।

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International News: SCO समिट में पीएम मोदी का हर एक्शन चर्चा में रहा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से गर्मजोशी से गले लगना, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हाथ मिलाना और तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान की पीठ थपथपाना… इन सबने साफ कर दिया कि भारत किसके करीब है और किससे दूरी बनाए हुए है। वहीं, पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ की ओर न देखना तक, अपने आप में बहुत बड़ा पैग़ाम था। सबसे ज्यादा चर्चा मोदी-पुतिन की दोस्ती की रही। दोनों एक ही कार में बैठे और करीब 45 मिनट तक बातचीत करते रहे। कहा गया कि पुतिन मोदी का इंतज़ार भी करते रहे। बाद में दोनों नेताओं की एक घंटे से ज्यादा चली मीटिंग ने साफ कर दिया कि भारत-रूस रिश्ते सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि गहरी दोस्ती पर टिके हैं।

शरीफ रहे किनारे खड़े

समिट का सबसे वायरल लम्हा वह रहा जब पीएम मोदी और पुतिन आपस में गहरी बातचीत करते हुए आगे बढ़ गए और शरीफ किनारे खड़े देखते रह गए। यह नज़ारा इस बात की गवाही दे रहा था कि पाकिस्तान को भारत की डिप्लोमेसी में अब कोई अहमियत नहीं दी जा रही। मोदी ने शरीफ को नजरअंदाज करके सीधा संदेश दिया कि आतंक को बढ़ावा देने वालों के लिए जगह नहीं है।

आतंकवाद पर कड़ा बयान

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद का मुद्दा तेज़ी से उठाया। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमला सिर्फ भारत पर नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत पर हमला था। उन्होंने SCO देशों से अपील की कि आतंकवाद के खिलाफ डबल स्टैंडर्ड छोड़ें और एकजुट होकर लड़ें। शरीफ की मौजूदगी में यह बयान और भी सख्त असर छोड़ गया।

एर्दोगान संग गर्मजोशी

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान से पीएम मोदी का मिलना भी खास रहा। तुर्की अक्सर पाकिस्तान का समर्थन करता है, लेकिन मोदी ने उनसे हाथ मिलाकर और पीठ थपथपाकर दिखा दिया कि भारत रिश्तों के नए आयाम बना सकता है। यह मुलाकात इस बात का इशारा थी कि भारत मुश्किल रिश्तों को भी बदलने का हुनर रखता है।

शी चिनफिंग संग मुलाक़ात

राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ मोदी की बातचीत हल्की-फुल्की और मुस्कान से भरी रही। अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी के बीच भारत और चीन की इस मुलाकात ने यह संदेश दिया कि बड़े खेल में भारत की भूमिका मज़बूत है और वह किसी एक खेमे का मोहताज नहीं है।

भारत की बातों को अहमियत

समिट के आखिर में जारी हुई तियानजिन घोषणा में भी भारत की मांगों को जगह मिली। इसमें पहलगाम हमले की निंदा की गई और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई गई। साफ हो गया कि SCO  में भारत की आवाज़ अब अनसुनी नहीं की जा सकती और दुनिया भारत की बातों को ग़ौर से सुन रही है। First Updated : Monday, 01 September 2025