नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में पिछले 40 दिनों से जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव को कम करने के लिए दोनों पक्षों ने युद्धविराम की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. इसी कड़ी में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सीमित आवागमन की सशर्त अनुमति देने का संकेत दिया है.
10 अप्रैल से इस्लामाबाद में शुरू होने वाली अहम वार्ता से पहले दोनों देशों के बीच बुधवार तड़के युद्धविराम पर सहमति बनी है. इस संघर्ष ने न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डाला है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर.
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने बयान जारी करते हुए कहा,
"यदि ईरान पर हमले रोक दिए जाते हैं, तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं अपने रक्षात्मक अभियान बंद कर देंगी."
उन्होंने आगे बताया कि ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से "दो सप्ताह की अवधि के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन संभव होगा."
जो वार्ता के तहत तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.
हालिया संघर्ष के दौरान ईरान द्वारा जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद यह मार्ग लगभग बंद हो गया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया.
इस मार्ग को दोबारा खोलना अमेरिका की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है, जिसे अब वार्ता के जरिए सुलझाने की कोशिश की जा रही है.
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार, इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार 10-सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर हो रही है. इस प्रस्ताव में जलडमरूमध्य से सुरक्षित पारगमन, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसे मुद्दे शामिल हैं.
ईरान ने साफ किया है कि यह पहल पूरी तरह से शांति का संकेत नहीं है. बयान में कहा गया, "यह स्पष्ट किया जाता है कि इसका मतलब युद्ध की समाप्ति नहीं है," और साथ ही चेतावनी दी गई, "हमारे हाथ अभी भी ट्रिगर पर हैं और किसी भी गलती का पूरा बलपूर्वक उत्तर दिया जाएगा."
ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम को स्वीकार कर लिया है, जिसे उसने अपनी कूटनीतिक सफलता बताया है. इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है.
इस्लामाबाद में शुरू होने वाली यह वार्ता करीब 15 दिनों तक चल सकती है. यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है, ताकि एक व्यापक समझौते का ढांचा तैयार किया जा सके.
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, युद्धविराम को औपचारिक रूप से लागू करने के लिए जरूरी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाए.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद रिपोर्ट्स में सामने आया कि ईरान ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.
साथ ही, चीन ने भी हस्तक्षेप करते हुए तनाव कम करने और लचीलापन दिखाने की अपील की, ताकि संभावित आर्थिक नुकसान से बचा जा सके.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी इस युद्धविराम को मंजूरी दे दी है, जो इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम राजनीतिक संकेत माना जा रहा है. First Updated : Wednesday, 08 April 2026