नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच अब दुनिया की नजरें स्विट्जरलैंड पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण शांति वार्ता शुरू होने वाली है. दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए बातचीत की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि वार्ता शुरू होने से पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नया विवाद सामने आ गया है, जिसने हालात को और संवेदनशील बना दिया है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, जबकि ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल एक दिन पहले ही वहां पहुंच गया था. दोनों पक्षों के बीच मुख्य चर्चा क्षेत्रीय सुरक्षा, युद्धविराम और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर होने वाली है.
वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद कर दिया है. वहीं अमेरिका ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि इस मार्ग से व्यापारिक जहाजों का आवागमन सामान्य रूप से जारी है. यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में इसे लेकर पैदा हुई अनिश्चितता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.
हाल ही में अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के युद्धविराम पर सहमति जताई थी, ताकि बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल बनाया जा सके. यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के बीच हुए एक अंतरिम समझौते का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुआ विवाद इस प्रक्रिया को मुश्किल बना सकता है. दोनों देशों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती युद्धविराम को कायम रखते हुए आगे की बातचीत को सफल बनाना है.
ईरान की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर क़लीबाफ़ कर रहे हैं. उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराकची, सुरक्षा मामलों के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय बैंक के प्रतिनिधि और तेल क्षेत्र से जुड़े अधिकारी भी मौजूद हैं. वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल हैं. दोनों पक्ष कई दिनों तक चर्चा कर सकते हैं.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि तेहरान इस बैठक में पहले से हुए समझौतों को लागू कराने पर जोर देगा. उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे पक्ष द्वारा अपने दायित्वों को पूरा करने का रिकॉर्ड संतोषजनक नहीं रहा है. दूसरी ओर जेडी वैंस ने भरोसा जताया कि युद्धविराम जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद किया गया है. वैंस ने यह भी उम्मीद जताई कि बातचीत के दौरान परमाणु कार्यक्रम और लेबनान से जुड़े मुद्दों पर प्रगति हो सकती है.
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होने की एक अहम शर्त लेबनान में हिंसा को रोकना भी थी. हालांकि युद्धविराम लागू होने के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. लेबनान के नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के कुछ समय बाद ही इजरायली हमलों में कई लोगों की मौत हुई. वहीं इजराइल का कहना है कि वह हिजबुल्लाह की गतिविधियों के जवाब में कार्रवाई कर रहा है. हिजबुल्लाह ने भी स्पष्ट किया है कि वह लेबनान में इजराइल को पूरी तरह स्वतंत्र सैन्य गतिविधियों की अनुमति नहीं देगा. इससे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है.
हालांकि इजराइल अमेरिका-ईरान समझौते का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं है, फिर भी उसने संकेत दिए हैं कि वह अपने नियंत्रण वाले लेबनानी क्षेत्रों से फिलहाल पीछे नहीं हटेगा. रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली नेतृत्व ने सेना को गोलीबारी रोकने के निर्देश दिए हैं, लेकिन रणनीतिक क्षेत्रों में सैन्य उपस्थिति जारी रखने का फैसला लिया गया है. हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में इजरायली नागरिकों ने माना कि संयुक्त सैन्य अभियानों से अपेक्षित लक्ष्य हासिल नहीं हुए. कई लोगों ने सरकार के दावों पर भी सवाल उठाए और कहा कि संघर्ष से जुड़े घोषित उद्देश्यों को पूरी तरह पूरा नहीं किया जा सका.
इस बीच स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के आगमन का स्वागत किया है. मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते के कार्यान्वयन और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्विट्जरलैंड बातचीत के लिए मंच उपलब्ध करा रहा है. First Updated : Sunday, 21 June 2026