नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते सैन्य तनाव का असर दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर साफ दिखाई देने लगा है. लगातार बढ़ते खतरे के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं.
समुद्री निगरानी एजेंसियों के अनुसार, हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले बड़े जहाजों की संख्या तेजी से घटी है. जहां युद्ध शुरू होने से पहले हर दिन करीब 130 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर बेहद कम रह गई है. कई शिपिंग कंपनियां सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों का मार्ग बदल रही हैं या यात्रा टाल रही हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य कार्रवाई ने इस क्षेत्र में जोखिम काफी बढ़ा दिया है. हाल ही में ईरान के दक्षिणी हिस्से में कई धमाकों की खबरें सामने आई. इससे पहले अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया. इसी तनाव के कारण समुद्री कंपनियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं और कई जहाज अपनी लोकेशन सार्वजनिक करने से भी बच रहे हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है. यदि यहां लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. हालांकि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बहुत बड़ा उछाल नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में आपूर्ति कम होने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
विश्लेषकों का मानना है कि गर्मियों के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत में 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. खासकर डीजल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजर अब होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी हुई है. यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार, शिपिंग उद्योग और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. First Updated : Friday, 10 July 2026