नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार गहराता जा रहा है. एक ओर अमेरिका ने ईरान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाते हुए परमाणु समझौते के लिए समयसीमा तय कर दी है, तो दूसरी ओर ईरान और रूस ने समुद्र में अपनी सैन्य साझेदारी का प्रदर्शन कर शक्ति संतुलन का संदेश दिया है.
ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर में हुए इस संयुक्त युद्धाभ्यास को ऐसे समय में अंजाम दिया गया, जब वॉशिंगटन की ओर से तेहरान को कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है. इससे क्षेत्र में सामरिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और संभावित टकराव की आशंका भी बढ़ी है.
ईरान की सेना, आईआरजीसी और रूसी नौसेना ने ‘मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026’ के तहत रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में संयुक्त अभ्यास किया. इस युद्धाभ्यास में बंधक बनाए गए जहाजों को मुक्त कराने और समुद्री डकैती रोधी अभियानों का प्रशिक्षण शामिल रहा.
विशेषज्ञ इसे क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के जवाब के रूप में देख रहे हैं. यह अभ्यास तेहरान और मॉस्को के बीच गहराते सैन्य सहयोग का संकेत भी माना जा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि ईरान के पास परमाणु समझौते के लिए 10 से 15 दिन का अधिकतम समय है.
उन्होंने कहा कि यदि इस तय समयसीमा के भीतर "सार्थक समझौता" नहीं हुआ, तो ईरान के लिए स्थिति "दुर्भाग्यपूर्ण" हो सकती है और अमेरिका "अगला कदम" उठाने पर विचार करेगा. ट्रंप के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.
तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य तैनाती को और मजबूत किया है. यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से ही अरब सागर में मौजूद है, जबकि दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड भी पश्चिम एशिया की ओर बढ़ रहा है.
इस कदम को ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
रूस ने साफ संकेत दिया है कि वह ईरान पर किसी भी हमले को स्वीकार नहीं करेगा. वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने बाहरी आक्रामकता का डटकर सामना करने का आह्वान किया है.
इन बयानों और सैन्य गतिविधियों ने पश्चिम एशिया में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जहां कूटनीति और सैन्य शक्ति प्रदर्शन समानांतर रूप से चल रहे हैं. First Updated : Friday, 20 February 2026