इजरायल और ईरान की दुश्मनी तो दुनिया जानती है, लेकिन इजरायल के विरोधियों की फेहरिस्त इससे कहीं लंबी है. तुर्की भी उन देशों में शुमार है, जिन्हें इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है. इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेत ने हाल ही में चेतावनी दी है कि तुर्की 'नया ईरान' बनता जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि तुर्की सऊदी अरब को इजरायल के खिलाफ भड़का रहा है और एक 'सुन्नी एक्सिस' बनाने की कोशिश में लगा है.
बेनेत के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन बेहद चतुर और जोखिम भरी रणनीति अपनाकर इजरायल को चारों ओर से घेरने की साजिश रच रहे हैं. जहां ईरान हिजबुल्लाह और हुती जैसे संगठनों के माध्यम से इजरायल पर हमले करवाता रहा है. वहीं तुर्की अपनी राजनयिक विश्वसनीयता और आर्थिक शक्ति का उपयोग कर एक ज्यादा मजबूत और सुनियोजित चुनौती पेश कर रहा है.
नेफ्ताली बेनेत की मुख्य चिंता तुर्की, कतर और पाकिस्तान के बीच उभरते 'सुन्नी एक्सिस' को लेकर है. उनका कहना है कि तुर्की ने सऊदी अरब को इजरायल के साथ संबंध सामान्यीकरण की प्रक्रिया से पीछे हटा दिया है. 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद सऊदी अरब का रवैया काफी कड़ा हो गया. इससे पहले सऊदी और इजरायल के बीच रिश्ते सुधारने पर चर्चा चल रही थी. अमेरिका की ओर से भी कथित तौर पर सऊदी पर इजरायल से संबंध बेहतर करने का दबाव था.
समय-समय पर ऐसी रिपोर्ट्स आईं कि सऊदी अरब किसी भी हाल में परमाणु क्षमता प्राप्त करना चाहता है और इसी मुद्दे पर अमेरिका से उसकी बातचीत जारी थी. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की मांग देश के लिए नागरिक परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की थी, हालांकि कई बार यह दावा किया गया कि उनकी वास्तविक इच्छा परमाणु हथियार हासिल करने की हो सकती है. लेकिन हमास के हमले के बाद यह सारी प्रक्रिया ठप पड़ गई. गाजा में इजरायली अभियान के बाद मध्य पूर्व के रणनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए. अब सऊदी-इजरायल संभावित समझौते की संभावनाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं और सऊदी अरब नए सहयोगियों की तलाश में जुटा हुआ दिखाई दे रहा है.
सितंबर 2025 में सऊदी अरब और परमाणु संपन्न पाकिस्तान के बीच रणनीतिक रक्षा समझौता हुआ, जिसमें किसी एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा. अब तुर्की भी इस गठजोड़ में शामिल होने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. कुछ जानकार इसे इस्लामिक नाटो का नाम दे रहे हैं. अब कभी-कभी यह दावा भी किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने सऊदी को परमाणु हथियार प्रदान करने की बात की है. इजरायल के लिए पाकिस्तान की इस गठबंधन में संभावित भागीदारी सबसे बड़ी चिंता का विषय है. बेनेत ने इसे 'न्यूक्लियर रियर' यानी परमाणु समर्थन बताया है. विशेषज्ञों का विचार है कि तुर्की अपनी सैन्य तकनीक और आर्थिक मदद के बदले पाकिस्तान से रणनीतिक सुरक्षा प्राप्त कर सकता है.
इतना ही नहीं, तुर्की ने पाकिस्तान के साथ मिलकर कराची तट पर एक नौसैनिक सुविधा जैसा अधिकार भी हासिल किया है, जिससे लाल सागर और हिंद महासागर में इजरायल के व्यापारिक रास्तों पर दबाव डालने की आशंका जताई जा रही है.
इजरायल के पूर्व पीएम बेनेत के अनुसार, इस पूरे समीकरण में कतर की भूमिका कैशियर और प्रोपगैंडा मशीन जैसी है. माना जाता है कि कतर अपनी आर्थिक मजबूती और बड़े-बड़े मीडिया नेटवर्क के जरिए इस सुन्नी एक्सिस को वैचारिक आधार प्रदान कर रहा है. उनका आरोप है कि तुर्की और कतर मिलकर 'मुस्लिम ब्रदरहुड' जैसी विचारधाराओं को बढ़ावा दे रहे हैं, जो इजरायल के अस्तित्व के लिए खतरा हैं.
नेफ्ताली बेनेत का कहना है कि 7 अक्टूबर के हमले ने इजरायल की पारंपरिक सुरक्षा रणनीतियों को झकझोर दिया है. अब सिर्फ रक्षात्मक नीति से काम नहीं चलेगा, बल्कि सक्रिय और आक्रामक रणनीति अपनाने की आवश्यकता है. उनके अनुसार, तुर्की नाटो का सदस्य होने के बावजूद एक समानांतर सुरक्षा ढांचा तैयार कर रहा है, जो पश्चिमी देशों और इजरायल के हितों के विपरीत जा सकता है. First Updated : Thursday, 19 February 2026