Trump Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर 70 से अधिक देशों से आने वाले आयातित सामानों पर 10% से लेकर 41% तक के प्रतिशोधात्मक टैरिफ लागू कर दिए हैं. इस फैसले का असर भारत पर भी पड़ेगा, भारत पर 25% टैरिफ लगाया गया है. ट्रंप के नए आदेश के मुताबिक कनाडा पर टैरिफ दर को 25% से बढ़ाकर 35% कर दिया गया है.
व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्टशीट के अनुसार, यह आदेश हस्ताक्षर किए जाने के सात दिन बाद से प्रभावी हो जाएगा. हालांकि, इसमें कुछ छूट भी दी गई है. 7 अगस्त तक जो सामान जहाजों पर लोड हो जाएंगे और 5 अक्टूबर तक अमेरिका पहुंच जाएंगे, उन पर पुराने शुल्क ही लागू रहेंगे. कनाडा को इसमें कोई छूट नहीं दी गई है. कनाडा से आयात पर 35% शुल्क आदेश के कुछ घंटों के भीतर, 1 अगस्त से ही लागू हो गया है.
नए आदेश में विभिन्न देशों पर अलग-अलग टैरिफ निर्धारित किए गए हैं-
41% शुल्क: सीरिया
40% शुल्क: लाओस, म्यांमार
39% शुल्क: स्विट्जरलैंड
35% शुल्क: इराक, सर्बिया, कनाडा
30% शुल्क: अल्जीरिया, बोस्निया, लीबिया, दक्षिण अफ्रीका
25% शुल्क: भारत, ब्रुनेई, कजाखस्तान, मोल्डोवा, ट्यूनिशिया
20% शुल्क: बांग्लादेश, श्रीलंका, ताइवान, वियतनाम
19% शुल्क: पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, कंबोडिया, फिलीपींस, थाईलैंड
18% शुल्क: निकारागुआ
15% शुल्क: इज़रायल, जापान, तुर्की, नाइजीरिया, घाना और अन्य
10% शुल्क: ब्राजील, यूनाइटेड किंगडम, फॉकलैंड द्वीप
यूरोपीय संघ के लिए: जिन वस्तुओं पर अमेरिका में वर्तमान शुल्क 15% से ऊपर है, वे नई टैरिफ व्यवस्था से मुक्त रहेंगी. जबकि जिन पर 15% से कम शुल्क है, उनका शुल्क बढ़ाकर 15% किया जाएगा, जिसमें मौजूदा दर घटाई जाएगी.
ट्रंप प्रशासन ने इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया है. यह आदेश पहले जारी कार्यकारी आदेश 14257 का विस्तार है, जिसमें अमेरिका के व्यापार घाटे को एक असाधारण और असामान्य खतरा घोषित किया गया था.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "कुछ व्यापार साझेदारों ने ऐसे प्रस्ताव दिए हैं जो मेरी राय में व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं." उन्होंने यह भी जोड़ा, "कुछ देशों ने न तो बातचीत में हिस्सा लिया और न ही अमेरिका के साथ आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर तालमेल बनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए."
भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ को अमेरिका के अन्य प्रमुख व्यापार साझेदारों की तुलना में अधिक सख्त माना जा रहा है. यह फैसला महीनों से चल रही द्विपक्षीय वार्ताओं को खतरे में डाल सकता है.
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया, "भारत हमेशा से एक बंद बाजार रहा है. इसके अलावा कई भू-राजनीतिक मसले भी हैं." उन्होंने यह भी कहा, "राष्ट्रपति ब्रिक्स सदस्यता, रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दों पर चिंता जाहिर कर चुके हैं." First Updated : Friday, 01 August 2025