ट्रंप फिर मैदान में, उथल-पुथल भरे साल के बाद स्टेट ऑफ द यूनियन, मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ा संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति अपने पहले साल को आर्थिक उभार, सख्त बॉर्डर सुरक्षा और मजबूत महाशक्ति अमेरिका के रूप में पेश करने की तैयारी में हैं. फिर भी कई आम अमेरिकी महंगाई की मार से जूझ रहे हैं और ध्रुवीकरण वाली नीतियों से बेचैन नजर आते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को कांग्रेस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के लिए पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी सरकार को मेकिंग अमेरिका ग्रेट अगेन के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ाने का दावा पेश किया. यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी कई नीतियां विवादों और चुनौतियों का सामना कर रही हैं, फिर भी ट्रंप इसे अपनी उपलब्धियों का सबसे बड़ा मंच बनाने जा रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप का संबोधन
ट्रंप का संबोधन मंगलवार रात 9 बजे ईटी बुधवार सुबह 7:30 बजे आईएसटी पर निर्धारित है, जिसमें ट्रंप कांग्रेस के संयुक्त सत्र के सामने खड़े होकर अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल को आर्थिक पुनरुत्थान, सख्त सीमा सुरक्षा और अमेरिका को एक निर्णायक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के रूप में पेश करेंगे. मध्यावधि चुनावों से ठीक कुछ महीने पहले यह संबोधन न केवल नीतिगत घोषणाओं का मंच बनेगा, बल्कि जनता की बदलती धारणा को संबोधित करने का उनका अब तक का सबसे महत्वपूर्ण प्रयास भी होगा.
स्टेट ऑफ द यूनियन का क्या है महत्व?
स्टेट ऑफ द यूनियन अमेरिकी राष्ट्रपति का संवैधानिक दायित्व है, जिसमें वे कांग्रेस को राष्ट्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य की प्राथमिकताओं के बारे में रिपोर्ट देते हैं. समय के साथ यह वाशिंगटन का सबसे बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम बन चुका है. जो नीति दस्तावेज, राजनीतिक संदेश और टेलीविजन स्पेक्टेकल का अनोखा मिश्रण है.
ट्रंप के संबोधन से क्या उम्मीद की जा रही है?
ट्रंप अमेरिकी अर्थव्यवस्था के तेज विस्तार पर जोर देंगे और नौकरी सृजन, घरेलू विनिर्माण में वृद्धि तथा शेयर बाजार के रिकॉर्ड लाभ का हवाला देंगे. उन्होंने दावा किया है कि मुद्रास्फीति अब नियंत्रण में है और उनकी नीतियों ने अर्थव्यवस्था को मजबूत नींव प्रदान की है. फिर भी जनता की राय बंटी हुई है. रिपोर्टों के मुताबिक पिछले साल के अंत में आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हुई है और अधिकांश परिवार अभी भी जीवन-यापन की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बाजार या बेरोजगारी जैसे प्रमुख संकेतक अक्सर आम लोगों की दैनिक आर्थिक परेशानियों को नहीं दर्शाते.
दूसरे कार्यकाल से ही आप्रवासन नीति पर तेज विवाद चल रहा है. ट्रंप का दावा है कि उनके कार्यकाल में अवैध सीमा पार करने की घटनाएं काफी कम हुई हैं, लेकिन आईसीई की आक्रामक निर्वासन कार्रवाइयों के बाद मिनेसोटा में हुई हत्याओं ने विवाद को और भड़का दिया है.
व्यापार नीति भी चर्चा में रहेगी, खासकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद जिसमें ट्रंप की वैश्विक टैरिफ व्यवस्था के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया गया. राष्ट्रपति ने इस फैसले की आलोचना की और नए 15 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं. उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते तलाशे जाएंगे.
ट्रंप विदेश नीति और सैन्य कार्रवाइयों पर भी जोर देंगे, जिसमें ईरान से जुड़े ठिकानों पर संभावित हमले, वेनेजुएला पर दबाव और दुनिया भर के संघर्षों में युद्धविराम की कोशिशें शामिल हैं. तेहरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच मध्य पूर्व में दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए गए हैं.
हालिया सर्वेक्षणों में ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट दिख रही है. उनके समर्थन का स्तर उच्च 30 के दशक में है जबकि अस्वीकृति लगभग 60 प्रतिशत के आसपास है. इप्सोस सर्वे के अनुसार 60 प्रतिशत अमेरिकी उनकी कार्यशैली से असंतुष्ट हैं, जबकि केवल 39 प्रतिशत संतुष्ट हैं.
मुद्रास्फीति, टैरिफ और आप्रवासन जैसे मुद्दों पर रेटिंग
मुद्रास्फीति, टैरिफ और आप्रवासन जैसे मुद्दों पर रेटिंग उनकी रेटिंग विशेष रूप से कमजोर है. युवा मतदाताओं में उनका समर्थन तेजी से गिरा है. बुधवार का यह संबोधन नवंबर के मध्यावधि चुनावों के लिए एक शुरुआती चुनावी मंच के रूप में भी काम करेगा. ट्रंप खुद चुनाव में नहीं हैं, लेकिन परिणाम यह तय करेंगे कि उनके बाकी कार्यकाल में वे कितनी आजादी से शासन कर पाएंगे.


