ट्रंप के बयान से दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान पर, क्या सोमवार को कुछ होने वाला हैं?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार तक समझौते की संभावना जताई, लेकिन असफलता पर कड़े सैन्य कदमों की चेतावनी भी दी. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक तेल आपूर्ति व अर्थव्यवस्था पर खतरे की चिंता बढ़ा दी है.

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संबंध एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में हैं. इसी कड़ी में डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच सोमवार तक किसी समझौते पर पहुंचा जा सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका सख्त और निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.
ट्रंप ने इंटरव्यू में क्या कहा?
ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है और सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. उनके मुताबिक, समझौते की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि असफलता की स्थिति में अमेरिका सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है. उन्होंने यहां तक संकेत दिए कि तेल संसाधनों पर नियंत्रण जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिससे क्षेत्र में हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं.
इस बीच, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. ट्रंप ने ईरान को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने के लिए समयसीमा दी है. उन्होंने कहा कि यदि ईरान ऐसा नहीं करता, तो अमेरिका उसके अहम बुनियादी ढांचे जैसे पावर प्लांट और पुलों को निशाना बना सकता है. गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है. इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
जोखिमभरा रेस्क्यू ऑपरेशन
तनाव के इसी माहौल में अमेरिका ने ईरान के भीतर एक जोखिमभरा रेस्क्यू ऑपरेशन भी अंजाम दिया. जानकारी के अनुसार, एक घायल एयरमैन को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिकी स्पेशल फोर्स को पहाड़ी इलाके में भेजा गया. ट्रंप ने इस मिशन को बेहद साहसिक बताते हुए अमेरिकी सैन्य क्षमता का उदाहरण बताया.
वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि इस ऑपरेशन में इजरायल ने अमेरिका का सहयोग किया. दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी विमानों और हेलिकॉप्टरों को निशाना बनाया. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
कुल मिलाकर, मौजूदा हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं. तेल आपूर्ति पर खतरे के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है. अब पूरी दुनिया की नजर सोमवार पर टिकी है, जब यह साफ हो पाएगा कि कूटनीति कामयाब होती है या तनाव और गहराता है.


