अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट आज उस मामले पर फैसला देने वाली है, जिसने पूरी दुनिया के व्यापार को हिला दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने आयात पर भारी टैरिफ लगाए थे। उनका कहना था कि इससे अमेरिका की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। लेकिन अब अदालत देख रही है कि क्या राष्ट्रपति को इतना अधिकार है। बाजार के लोग मान रहे हैं कि ट्रंप के खिलाफ फैसला आ सकता है। 73 प्रतिशत ट्रेडर्स यही सोच रहे हैं। इसलिए वॉल स्ट्रीट में आज बेचैनी है।
इस केस का असली सवाल यही है कि क्या अमेरिका का राष्ट्रपति संसद को बिना बताए इतने बड़े आर्थिक कदम उठा सकता है। ट्रंप ने कहा था कि हालात आपात जैसे थे। लेकिन कई नेता और विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि ऐसे फैसले कानून के तहत होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट अब इसी सीमा को तय करेगी। अगर अदालत ने ट्रंप की ताकत घटाई तो आगे आने वाले राष्ट्रपति भी बंध जाएंगे। यही वजह है कि यह मामला बहुत बड़ा बन गया है।
ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के आंकड़े साफ बता रहे हैं कि बाजार ट्रंप के पक्ष में नहीं है। 73 प्रतिशत लोग मानते हैं कि टैरिफ अवैध घोषित होंगे। इसका मतलब है कि निवेशकों को ट्रंप की नीति पर भरोसा नहीं है। अगर अदालत ने टैरिफ गिरा दिए तो कई कंपनियों को राहत मिलेगी। कुछ को नुकसान होगा। यही अनिश्चितता आज बाजार को डराए हुए है।
डोनाल्ड ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि उनके टैरिफ से अमेरिका मजबूत हुआ। उनका दावा है कि इससे फैक्ट्रियां वापस आईं और नौकरियां बढ़ीं। ट्रंप कहते हैं कि विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश करने को मजबूर हुईं। लेकिन आलोचक कहते हैं कि इससे आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ा। कार, मोबाइल और कई सामान महंगे हुए। अब अदालत को तय करना है कि सच क्या है।
भारत के लिए भी यह फैसला बहुत अहम है। ट्रंप के टैरिफ से पहले भारतीय निर्यात पर असर पड़ा था। आईटी, फार्मा और ऑटो सेक्टर को नुकसान हुआ था। अगर अदालत टैरिफ को गलत ठहराती है तो भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में राहत मिल सकती है। इससे शेयर बाजार को भी फायदा हो सकता है। इसलिए भारत में निवेशक भी इस फैसले को ध्यान से देख रहे हैं।
ट्रंप खुद कह चुके हैं कि अगर अदालत ने टैरिफ गलत बताए तो अमेरिका को भारी पैसा लौटाना पड़ सकता है। कंपनियां कहेंगी कि उनसे गलत टैक्स लिया गया। दूसरे देश भी जवाबी शुल्क लगा सकते हैं। इससे वैश्विक व्यापार में नई परेशानी आ सकती है। यही वजह है कि यह फैसला इतना संवेदनशील माना जा रहा है।
आज रात आने वाला फैसला सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। यह तय करेगा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाएगी। डॉलर मजबूत होगा या कमजोर। शेयर बाजार ऊपर जाएगा या नीचे। भारत से लेकर यूरोप तक सब पर असर पड़ेगा। इसलिए पूरी दुनिया की नजरें आज सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। First Updated : Wednesday, 14 January 2026