इस्लामाबाद में पाकिस्तान के लिए खाड़ी देशों से जुड़ी हाल की खबरें चिंता का विषय बन गई हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान के साथ इस्लामाबाद एयरपोर्ट के मैनेजमेंट की डील से खुद को पीछे हटा लिया है. अगस्त 2025 में दोनों देशों ने इस प्रोजेक्ट के फ्रेमवर्क पर सहमति जताई थी, लेकिन अब यूएई ने इस महत्वपूर्ण डील में रुचि खो दी है.
यह जानकारी ऐसे समय आई है जब UAE के राष्ट्रपति शेख जाएद बिन अल नाह्यान ने इसी सप्ताह अचानक भारत का दौरा किया था. डील क्यों फेल हुई, इसकी आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और UAE के बीच बढ़ते तनाव का इसका प्रभाव हो सकता है.
पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ बढ़ती नजदीकी ने UAE को अलर्ट कर दिया है. हाल के वर्षों में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच महत्वपूर्ण रक्षा साझेदारियां हुई हैं. सितंबर 2025 में दोनों देशों ने ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया कि किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी सेना को प्रशिक्षण दे रहा है और इसके बदले रियाद ने इस्लामाबाद को वित्तीय मदद भी दी है. 2018 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का सहायता पैकेज दिया था. इन बढ़ती नजदीकियों के कारण UAE ने पाकिस्तान के प्रोजेक्ट से दूरी बनाना शुरू किया.
वहीं, UAE इस समय भारत के करीब आता दिख रहा है. सऊदी अरब के साथ यमन और अफ्रीका के कुछ देशों जैसे सोमालीलैंड और सूडान में टकराव के बीच अबू धाबी ने भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान दिया है. इसी सप्ताह भारत और UAE ने रक्षा और व्यापार क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत नई दिल्ली ने UAE से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) खरीदने के लिए 3 अरब डॉलर की डील साइन की, जिससे भारत अबू धाबी का सबसे बड़ा LNG ग्राहक बन गया है.
तुर्की भी सऊदी-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी में शामिल होने पर विचार कर रहा है, जिससे पाकिस्तान और रियाद की करीबी और मजबूत होती दिख रही है. इन बदलावों के बीच UAE ने पाकिस्तान के एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से पीछे हटकर भारत के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को प्राथमिकता दी है. इस कदम से पाकिस्तान को खाड़ी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. First Updated : Saturday, 24 January 2026